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इलाहाबाद हाईकोर्ट से आल्ट न्यूज के सह सम्पादक मोहम्मद जुबैर को बड़ा झटका, याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद जुबैर की याचिका खारिज कर दी है. जुबैर पर एफआईआर है जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.

इलाहाबाद हाई कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट
पंकज श्रीवास्तव
  • इलाहाबाद,
  • 14 जून 2022,
  • अपडेटेड 12:04 AM IST
  • धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप
  • यूपी पुलिस ने दर्ज की थी FIR

फैक्ट चेक वेबसाइट आल्ट न्यूज के सह सम्पादक को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद जुबैर की याचिका खारिज कर दी है. मोहम्मद जुबैर ने एक ट्वीट किया था जिसमें तीन हिंदू संतो यति नरसिंहानंद सरस्वती, बजरंगमुनि और आनंद स्वरूप को घृणा फैलाने वाला बताया था. जिसपर एफआईआर हुई थी. इसे लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.

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धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप
दरअसल, आल्ट न्यूज के संपादक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ हिंदुत्व संगठन राष्ट्रीय हिंदू शेर सेना के सीतापुर जिला प्रमुख भगवान शरण ने आरोप लगाया था कि मोहम्मद जुबैर के ट्वीट से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है. आरोप था कि मोहम्मद जुबैर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर हिंदू धर्मगुरुओं का अपमान किया है. यह भी आरोप लगा था कि राष्ट्रीय हिंदू शेर सेना के राष्ट्रीय संरक्षक महंत बजरंग मुनि के खिलाफ घृणा फैलाने वाले शब्द का इस्तेमाल किया गया. 

कोर्ट ने कहा- मामला बनता है
कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा है कि यह पूरा मामला केवल एक समय पूर्व चरण में है और रजिस्ट्रेशन की तारीख पर किए गए कुछ प्रारंभिक प्रयासों को छोड़ कर मामले की जांच अभी तक आगे बढ़ी नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा है कि मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन करने से प्रथम दृष्टया मामला मौजूदा चरण में बनता है और मामले में जांच के लिए पर्याप्त आधार प्रतीत होता है. सुनवाई करते हुए जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह याचिका खारिज कर दी.

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यूपी पुलिस ने दर्ज की थी FIR
मोहम्मद जुबैर के खिलाफ यूपी पुलिस ने आईपीसी की धारा 295 ए और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया था. इसके बाद FIR रद्द करने की मांग को लेकर मोहम्मद जुबैर इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे थे. याचिका में कहा गया था कि उन्होंने ट्वीट में किसी वर्ग ,धर्म की धार्मिक आस्था का अपमान नहीं किया और उनके खिलाफ जो एफआईआर लिखाई गई है वो केवल उत्पीड़न के लिए दर्ज की गई है लिहाजा इसे रद्द कर दिया जाए. 


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