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2019 में अकेले लड़ेंगी मायावती? कहा- सम्मानजनक सीटें नहीं मिली तो गठबंधन नहीं

इस बयान से साफ  है कि अखिलेश यादव के साथ मायावती के गठबंधन पर बातचीत तो चल रही है लेकिन इसे तब तक अंतिम नहीं माना जा सकता जब तक दोनों पार्टियों के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हो जाता.

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कुमार अभिषेक/जावेद अख़्तर
  • लखनऊ,
  • 27 मई 2018,
  • अपडेटेड 11:33 AM IST

कैराना चुनाव की वोटिंग के ऐन पहले मायावती के बयान ने सहयोगियों के माथे पर बल ला दिया है. शनिवार को लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद मायावती ने कहा 'यह सही है कि गठबंधन को लेकर उनकी बातचीत उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में राजनीतिक पार्टियों से चल रही है लेकिन गठबंधन तभी होगा जब सीटों का समझौता सम्मानजनक होगा.'

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साफ है अखिलेश यादव के साथ मायावती के गठबंधन पर बातचीत तो चल रही है लेकिन इसे तब तक अंतिम नहीं माना जा सकता जब तक दोनों पार्टियों के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हो जाता. मायावती ने गठबंधन न होने की स्थिति में कार्यकर्ताओं से अकेले लड़ने को भी तैयार रहने को कहा है.

मायावती ने ये कहा

मायावती ने कहा, 'पार्टी किसी भी राज्य में व किसी भी चुनाव में, किसी भी पार्टी के साथ केवल 'सम्मानजनक' सीटें मिलने की स्थिति में ही कोई चुनावी गठबंधन या समझौता करेगी. अन्यथा फिर हमारी पार्टी अकेली ही चुनाव लड़ना ज्यादा बेहतर समझती है.'

हालांकि इस मामले में हमारी पार्टी की उत्तर प्रदेश सहित कई और राज्यों में भी गठबंधन करके चुनाव लड़ने की बातचीत चल रही है, लेकिन फिर भी आप लोगों को हर परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए अपने-अपने प्रदेश में पार्टी के संगठन को हर स्तर पर तैयार करना है.

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बता दें कि कैराना लोकसभा उपचुनाव को लेकर कि अभी तक मायावती ने समर्थन का ऐलान नहीं किया है. हालांकि अजीत सिंह की पार्टी आरएलडी और समाजवादी पार्टी के मुताबिक गठबंधन के संकेत दिए जा चुके हैं और उनके वोटर्स गठबंधन को वोट जरूर करेंगे, लेकिन मायावती ने कैराना और नूरपुर उपचुनाव में अपने पत्ते नहीं खोले हैं.

गौरतलब है कि पिछले दिनों बेंगलुरु में कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण के दौरान मायावती और सोनिया गांधी के बीच बहुत ही मधुर केमिस्ट्री देखने को मिली थी. साथ ही मायावती किसी नेता से मिलने नहीं गई बल्कि तमाम नेता उनसे मिलने उनके होटल के कमरे में आए थे. यह दिखाता है कि मायावती ने खुद को गठबंधन में सबसे अहम और सबसे बड़े पार्टनर के तौर पर पेश किया है. अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दौरान मायावती का यह बयान कि 'कोई भी गठबंधन सम्मानजनक सीटों पर समझौते के बगैर नहीं होगा' इसने समाजवादी पार्टी सहित दूसरे दलों को भी दबाव में ला दिया है.

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