
कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रदर्शन की समीक्षा कर रहे हैं. इस संबंध में लखनऊ में कांग्रेस की मीटिंग चल रही है. इस मीटिंग में कांग्रेस पार्टी के नेता, जिलाध्यक्ष, कोर्डिनेटर मौजूद हैं. हाल के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जिम्मा था. इस इलाके में लोकसभा की 39 सीटें आती हैं. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जबर्दस्त हार झेलना पड़ा है.
ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपा गया था. पश्चिमी यूपी में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और पार्टी कोई सीट नहीं जीत पाई. खास बात है कि कांग्रेस सिर्फ रायबरेली सीट जीत पाई. खुद पार्टी चीफ राहुल गांधी भी अमेठी लोकसभा सीट बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी के हाथों हार गए.
यूं तो यूपी में असली जंग सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी के बीच थी. जहां एनडीए ने बाजी मारते हुए 64 सीटों पर जीत हासिल की. वहीं सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन को 15 और कांग्रेस को एक सीट पर जीत मिली. बाहरियों को टिकट देना, संगठन का कमजोर ढांचा और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बुरा बर्ताव. ये ऐसे फैक्टर्स हैं, जिन्होंने जीत की रेस से कांग्रेस को पूरी तरह बाहर कर दिया.
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि सपा-बसपा गठबंधन बनने के बाद जनता ने कांग्रेस को विकल्प के तौर पर देखना छोड़ दिया. कांग्रेस उम्मीदवार जनता को यह भरोसा दिलाने में नाकामयाब रहे कि वे जीतने के लिए मैदान में हैं. रही सही कसर प्रियंका गांधी के उस बयान ने पूरी कर दी, जिसमें उन्होंने कहा कि हम वोट कटवा हैं. इससे कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों का मनोबल और गिर गया.