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कोरोना का कहर! कानपुर के एक गांव में 15 दिन में 30 लोगों की मौत

कानपुर से 50 किलोमीटर दूर घाटमपुर के परास गांव में सन्नाटा पसरा है. हर कोई खौफजदा है. दरअसल, गांव में बीते 15 दिन में ही करीब 30 लोगों की जान चली गई.

कोरोना के कारण कानपुर की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई हैं (फोटो-PTI) कोरोना के कारण कानपुर की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई हैं (फोटो-PTI)
संतोष शर्मा
  • कानपुर,
  • 03 मई 2021,
  • अपडेटेड 8:44 AM IST
  • घाटमपुर के परास गांव का मामला
  • गांव के 30 लोगों की अब तक मौत

उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक शहर कानपुर से 50 किलोमीटर दूर घाटमपुर का परास गांव. यह गांव कानपुर की सबसे बड़ी ग्रामसभा है. अकेले इस गांव की आबादी 10 हजार है. कोरोना के कारण पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है. हर कोई खौफजदा है. दरअसल, गांव में बीते 15 दिन में ही करीब 30 लोगों की जान चली गई. 

किसी को 2 दिन पहले बुखार आया, अचानक से तबीयत बिगड़ी, सांस उखड़ने लगी, जब तक अस्पताल ले जाते दम तोड़ दिया तो कई तो ऐसे थे जो दिन भर अस्पताल के बाहर डॉक्टर साहब से दवा लेने के इंतजार में ही बैठे रहे और शाम को दम तोड़ दिया. उन्हीं में से एक राकेश सविता भी थे. राकेश सविता की मौत भी अचानक से आए बुखार और फिर इलाज न मिलने के चलते हो गई. राकेश के भतीजे तो सरकारी अस्पतालों की बदहाली को ही बयां कर चाचा की मौत का जिम्मेदार ठहराते हैं.

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इसी परास गांव की एक गली के घरों में तो एक साथ 8 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए. यह तो पुष्टि टेस्टिंग के बाद हुई कि गांव में अभी 14 लोग कोरोना संक्रमित हैं, लेकिन ज्यादातर घरों में लोग बीमार हैं. बुखार-खांसी के साथ अचानक सांस उखड़ना आम बात है. एक घर के दो सगे भाइयों सत्येंद्र गुप्ता और राजकुमार गुप्ता की मौत हो गई. सत्येंद्र की पत्नी कहती हैं कि शाम से ही उनके पति की सांस उखड़ रही थी, जब तक अस्पताल ले जाते पति की मौत हो चुकी थी.

तो वहीं राजकुमार का बेटा बताता है कि 5 दिन तक लगातार दौड़ने के बाद ना कोई सरकारी अस्पताल, ना कोई निजी अस्पताल भर्ती करने को तैयार हुआ, घर पर ऑक्सीजन सिलेंडर भी ले आए थे, लेकिन उससे पहले पापा दम तोड़ चुके थे. गांव में टेस्टिंग नहीं होती, जिन लोगों की टेस्टिंग में कोरोना की पुष्टि हुई, उनके सिर्फ नाम पता लिख लिया गया, दवा तक नहीं दी गई और वह कोरोना संक्रमित गांव में ऐसे ही घूम रहे हैं, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता.

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गांव वाले बताते हैं कि पीएचसी का तो एक साल से ताला ही नहीं खुला. डॉक्टर तो दूर स्वास्थ्य विभाग का एक मुलाजिम तक गांव में नहीं आया. जब गांव के हालात के बारे में निवर्तमान प्रधान पति ओंकार से पूछते हैं तो वह अपने ही रिश्तेदारों की हुई मौत से बताना शुरू करते हैं और बताते हैं कि हाल ही में लेखपाल और तहसीलदार ने जो सर्वे कराया उसके अनुसार हर घर से 2 लोग बीमार हैं. कोरोना के लक्षण है. गांव में कोई अस्पताल नहीं है. घाटमपुर में जांच नहीं होती.

जिस कोरोना ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को तक नहीं छोड़ा. इन बड़े शहरों की स्वास्थ्य सेवाएं इस बीमारी के आगे चरमरा गई, ऐसे हाल में परास गांव में फैला संक्रमण और उस संक्रमण में बीमार लोगों की जिंदगी तो बड़े खतरे में ही है.

 

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