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UP: चुनाव में कोरोना से मरने वाले कर्मचारियों के लिए 1 करोड़ मुआवजे की मांग, सरकार 30 लाख पर तैयार

कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पेंशनर्स अधिकार मंच के प्रधान महासचिव सुशील त्रिपाठी ने आजतक से बातचीत में कहा ''मेरी मांग है मुख्यमंत्री जी से कि अपने शासन आदेश को संशोधित करते हुए 30 लाख की जगह 1 करोड़ रुपए देने की स्वीकृति करें.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
सत्यम मिश्रा
  • लखनऊ ,
  • 04 जून 2021,
  • अपडेटेड 10:09 AM IST
  • शिक्षकों और कर्मचारियों के मंच ने की है मांग
  • तीस लाख की जगह एक करोड़ दिए जाएं
  • कहा- सुप्रीम कोर्ट ने भी एक करोड़ देने का दिया है सुझाव

यूपी में भीषण कोरोना महामारी के समय हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में, बहुत से शिक्षक और कर्मचारी चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना महामारी से संक्रमित हो गए थे, और एक बड़ी संख्या में उनकी मौत हो गई थी, जिसके कारण, शिक्षक और कर्मचारी संघ ने मुआवजे की मांग की थी.

इस मामले में सरकार की काफी किरकिरी होने के बाद, सरकार ने 30 लाख की अनुग्रह राशि देने को लेकर स्वीकृति दी थी. लेकिन अब कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पेंशनर्स अधिकार मंच ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मांग की है कि सरकार मुआवजा राशि को बढ़ाकर 1 करोड़ कर दिया जाए.

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कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पेंशनर्स अधिकार मंच के प्रधान महासचिव सुशील त्रिपाठी ने आजतक से बातचीत में कहा ''कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पेंशनर्स अधिकार मंच की मांग पर राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव में कोविड से मरने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के परिवारों के लिए 30 लाख की अनुग्रह धन राशि देने का शासनादेश जारी किया है. इस शासनादेश को जारी करने के लिए हम मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देते हैं.

उन्होंने कहा कि हम सरकार से मांग करते हैं कि कोरोना से मृत्यु होने पर राजस्व विभाग द्वारा 50 लाख की अनुग्रह राशि देने का शासनादेश जारी किया गया है. उच्च न्यायालय ने भी एक करोड़ की सहायता राशि देने का सुझाव राज्य सरकार को दिया है. मेरी मांग है मुख्यमंत्री जी से कि अपने शासन आदेश को संशोधित करते हुए 30 लाख की जगह 1 करोड़ रुपए देने की स्वीकृति करें.

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UP: पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना से 1,621 शिक्षा कर्मचारियों की मौत, प्राथमिक शिक्षक संघ लिस्ट जारी कर किया दावा

आपको बता दें कि चुनाव के दौरान कोरोना के संक्रमण में आने से जिन शिक्षकों की मौत हुई है उसे लेकर शिक्षक संघ ने एक लिस्ट भी जारी की थी जिसमें उन्होंने बताया कि चुनाव ड्यूटी में तैनात 1600 से अधिक शिक्षकों की मौत हो गई है. शिक्षका और कर्मचारी संघ ने पंचायत चुनाव को रद्द कराने की भी कोरोना काल में मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे अनदेखा कर दिया था, साथ ही साथ सरकार, शिक्षकों और कर्मचारियों की मौत के आंकड़े को भी गलत बता रही थी. जिसके कारण सरकार की किरकिरी हुई थी.

 

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