Advertisement

यूपी: बाढ़ से बेहाल वाराणसी, जानें क्यों हुआ काल भैरव का हिम श्रृंगार

वाराणसी इन दिनों बाढ़ के कहर से जूझ रही है. काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा काल भैरव का मंदिर में हिम श्रृंगार कराया गया. श्रद्धालुओं का मानना है कि इससे काशी में बाढ़ का संकट दूर होगा और प्राकृतिक आपदा से मुक्ति मिलेगी.

काल भैरव मंदिर में हुई भव्य पूजा-अर्चना. काल भैरव मंदिर में हुई भव्य पूजा-अर्चना.
रोशन जायसवाल
  • वाराणसी,
  • 13 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 6:43 AM IST
  • काशी के कोतवाल कहे जाते हैं काल भैरव
  • काल भैरव मंदिर में हुआ भव्य हिम श्रृंगार
  • कोरोना मुक्ति के लिए भी हुआ पाठ-पूजन

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ ने त्रासदी की स्थिति पैदा कर दी है. बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे लोग अब प्रशासन से हारकर भगवान से मदद की गुहार लगा रहे हैं. वाराणसी के प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा कालभैरव की आराधना कुछ इसी मंशा के साथ हुई है.

बाबा काल भैरव के दरबार में सावन माहीने में होने वाले वार्षिक हिम श्रृंगार में बाढ़ और कोरोना मुक्ति के लिए विशेष पूजन पाठ किया गया. इसके लिए चारों और बर्फ से सजावट की गई, जिससे बीच में कालभैरव का गर्भगृह नजर आए. उनके पूजन में मदिरा भी चढ़ाई गई और 56 भोग भी लगाए गए.

Advertisement

काल भैरव की पूजा के लिए फलों की लताएं लाई गई थीं, वहीं बर्फ से अमरनाथ के बाबा बर्फानी की प्रतिकृति भी तैयार की गई थी. जो लोग अमरनाथ दर्शन करने नहीं जा सके, उन्हें काशी में ही अमरनाथ के दर्शन मिल गए. सावन महीने में होने वाले इस हिम श्रृंगार की तैयारी बहुत भव्य तरीके से की गई थी.

बाढ़ से निजात की अरदास!

पुजारियों ने भगवान से गुहार लगाई की कोरोना और बाढ़ संकट से लोगों से की रक्षा हो. कोरोना और बाढ़ की शांति के लिए विशेष आराधना भी श्रद्धालुओं ने की. मंदिर के पुजारी जितेंद्र दुबे ने कहा कि करीब डेढ़ दशक पहले जब सूखा पड़ा था, तब बाबा का हिम श्रृंगार किया गया था. जिसके बाद से फिर कभी सूखा नहीं पड़ा.

काशी के कोतवाल कहे जाते हैं बाबा काल भैरव.

कोरोना खत्म कराने के लिए पूजा!

पुजारी ने कहा कि अब कालभैरव से गुहार लगाई गई है कि प्राकृतिक आपदा और बाढ़ से लोग जूझ रहे हैं. कोरोना की मार भी लोगों पर बुरी तरह से पड़ रही है. ऐसे में प्रार्थना की गई है कि जल्द से जल्द ऐसी स्थितियों से मुक्ति मिले. मंदिर में हिमश्रृंगार के दौरान कई लोग भी मौजूद रहे. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि पूजन से मौजूदा स्थितियों पर नियंत्रण होगा.
 

Advertisement

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement