
भारत के पहले रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का पहला ट्रेनसेट आज उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद के दुहाई डिपो पहुंच गया. इस ट्रेनसेट को गुजरात के सावली में स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से ट्रेलर पर लाद कर सड़क मार्ग द्वारा लाया गया. सावली, गुजरात से दुहाई डिपो पहुंची इस ट्रेन ने अपनी यात्रा में तीन राज्यों, राजस्थान, हरियाणा और अंत में उत्तर प्रदेश का सफर तय किया. इस ट्रेनसेट के सभी 6 डिब्बे अलग-अलग ट्रेलर पर लाद कर लाए गए.
दुहाई डिपो पहुंचने पर इन्हें क्रेन की सहायता से उतारा गया और अब आने वाले दिनों में डिपो में ही इस पूरी ट्रेन को असेंबल किया जाएगा. दुहाई डिपो में इनके लिए ट्रैक बनकर तैयार हो चुके हैं और ट्रेन की टेस्टिंग के लिए भी पूरी तैयारी है. आरआरटीएस ट्रेनों के संचालन के लिए दुहाई डिपो में ही प्रशासनिक भवन बनाया गया है.
पहली ट्रेन सराय काले खां-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर पर चलाई जाएगी. एरोडायनामिक आरआरटीएस ट्रेन सेट को गुजरात में एल्सटॉम के निर्माण कारखाने में एक ट्रेलर पर लोड किया गया था और इसे सड़क मार्ग से गाजियाबाद के दुहाई डिपो में लाया गया.
आरआरटीएस का पहला ट्रेन सेट 7 मई को वडोदरा जिले के सावली में निर्माण इकाई में आयोजित एक कार्यक्रम में एनसीआरटीसी को सौंपा गया था. आरआरटीएस ट्रेनों के संचालन के लिए डिपो में प्रशासनिक भवन भी बनाया गया है. आरआरटीएस ट्रेनों के टेस्टिंग और रखरखाव के लिए, 11 स्थिर लाइनें, दो वर्कशॉप लाइन, तीन इंटरनल-बे लाइन (आईबीएल) का निर्माण हुआ.
भारत की पहली क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम, दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ के बीच विकसित की जा रही आरआरटीएस ट्रेन वर्ष 2025 तक पूरी हो जाएगी. हालाकि इसके पहले चरण का काम लगभग पूरा हो गया है. ये करीब 17 किमी का फर्स्ट फेज है, जिसको 2023 तक शुरू करना है. हालाकि अधिकारियों की माने तो बहुत जल्द इस रूट पर ट्रायल शुरू हो जाएगा.
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