
उत्तर प्रदेश में मदरसों की जांच कराई जा रही है. मकसद है उनकी स्थिति सुधारी जाए और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के साथ आधुनिक शिक्षा भी बच्चों को मिले. इसके तहत बुधवार को महराजगंज जनपद के भारत-नेपाल के सीमावर्ती इलाके में चल रहे मदरसों की भी 12 बिंदुओं के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है.
भारत-नेपाल सोनौली सीमा के पास सुकरौली में मान्यता प्राप्त मदरसा अरबिया अहले सुन्नत मिस्बाहुल ओलूम चल रहा है. यहां जांच करने पहुंची टीम ने पाया कि अरबी, फारसी और उर्दू में यहां पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई का स्तर काफी अच्छा है. हालांकि, दूसरे विषयों जैसे विज्ञान, गणित और अंग्रेजी में बच्चों की पढ़ाई का स्तर बेहद खराब है.
जांच अधिकारियों ने बच्चों की आधुनिक शिक्षा की बदतर स्थिति को देखते हुए शिक्षकों को आधुनिक शिक्षा पर जोर देने की नसीहत दी. साथ ही पढ़ाई के स्तर और बेहतर करने को कहा. अधिकारियों का कहना है कि सभी मदरसों की जांच कर इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाएगी.
अधिकारियों का कहना है कि महराजगंज जनपद में मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या 205 है. इसके साथ ही गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या भी बहुत है. ऐसे मदरसों की जांच की जा रही है. इसमें मुख्य रूप से मदरसे की स्थापना, आय के स्रोत, शिक्षकों की संख्या सहित बच्चों के पढ़ाई का स्तर क्या है, यह जानकारी लेने के बाद रिपोर्ट बनाई जाएगी.
इन 12 बिंदुओं पर हो रही मदरसों की जांच