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राजधर्म नहीं बालहठ में लिप्त योगी सरकार, फिर फंसा सकती है: डॉ. कफील खान

कफील खान ने मथुरा जेल से रिहा होने के बाद कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार 'राजधर्म' करने की बजाय 'बाल हठ' में लिप्त थी. अब यूपी सरकार किसी अन्य मामले में फंसा सकती है.

डॉक्टर कफील खान (फाइल फोटो- पीटीआई) डॉक्टर कफील खान (फाइल फोटो- पीटीआई)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:20 AM IST
  • डॉ. कफील खान को जेल से किया रिहा
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट का रिहाई का आदेश
  • भड़काऊ भाषण देने का लगा था आरोप

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज से जुड़े रहे डॉक्टर कफील खान को मथुरा जेल से रिहा कर दिया गया है. अपनी रिहाई के बाद कफील खान का कहना है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उन्हें किसी अन्य मामले में फंसा सकती है.

कफील खान ने मथुरा जेल से रिहा होने के बाद कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार 'राजधर्म' करने की बजाय 'बाल हठ' में लिप्त थी. अब यूपी सरकार उनको किसी अन्य मामले में फंसा सकती है. दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत खान की हिरासत को रद्द कर दिया और उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया.

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खान के वकील इरफान गाजी ने पीटीआई को बताया, 'मथुरा जेल प्रशासन ने रात लगभग 11 बजे सूचना दी कि डॉ. कफील को रिहा कर दिया जाएगा और लगभग आधी रात को उन्हें छोड़ दिया गया. जेल से छूटने के बाद पीटीआई से बात करते हुए खान ने अदालत को धन्यवाद दिया और कहा, 'मैं हमेशा अपने सभी शुभचिंतकों का शुक्रगुजार रहूंगा, जिन्होंने मेरी रिहाई के लिए आवाज उठाई. प्रशासन रिहाई के लिए तैयार नहीं था, लेकिन लोगों की प्रार्थना से मुझे रिहा कर दिया गया है.'

डॉक्टर कफील खान ने कहा, 'रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने कहा था कि राजा राज धर्म के लिए काम करना चाहिए. लेकिन उत्तर प्रदेश में राजा राज धर्म नहीं निभा रहे हैं. बल्कि बाल हठ (बच्चों की तरह जिद्दी) कर रहे हैं.'

भड़काऊ भाषण देने का आरोप

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बता दें कि डॉ. कफील खान को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), एनआरसी और एनपीए के विरोध के दौरान कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था. हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. कफील को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए. कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा था कि एनएसए के तहत डॉक्टर कफील को हिरासत में लेना और हिरासत की अवधि को बढ़ाना गैरकानूनी है.

 

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