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"अधिकारियों का हिसाब-किताब..." वाले बयान पर अब्बास अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज 

अब्बास अंसारी द्वारा जनसभा के दौरान चुनाव के बाद अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग रोकने की बात कहीं गई थी साथ ही उनसे हिसाब किताब करने की भी बात मंच से कई गई थी 

अब्बास अंसारी (फाइल) अब्बास अंसारी (फाइल)
दुर्गा किंकर सिंह
  • मऊ ,
  • 26 मई 2022,
  • अपडेटेड 9:48 PM IST
  • अब्बास अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
  • मऊ में अधिकारियों को लेकर दिया था बयान

बाहुबली मुख्तार अंसारी के बड़े बेटे और मऊ सदर सीट से विधायक अब्बास अंसारी और उनके छोटे भाई उमर अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका विशेष न्यायाधीश/एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनवाई के बाद खारिज कर दी है. विशेष न्यायाधीश ने बचाव पक्ष के वकील दरोगा सिंह और एडीजीसी फौजदारी राणा प्रताप सिंह के तर्क सुनने के बाद यह फैसला लिया.
 
विधानसभा चुनाव के दौरान एक जनसभा के दौरान मऊ के पहाड़पुरा में अब्बास अंसारी द्वारा चुनाव के बाद अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग पर रोक लगाने और उनका हिसाब-किताब करने वाला बयान दिया था. अब्बास का बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था. इसी को लेकर आचार संहिता उल्लंघन के मामले में अब्बास अंसारी सहित अन्य लोगों के खिलाफ थाना कोतवाली मऊ में मुकदमा दर्ज किया गया था. जिसमें बाद में विवेचना के दौरान अन्य धाराएं बढ़ा दी गई थी.  

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भाषण हुआ था वायरल

चुनावी जनसभा में अब्बास अंसारी के भाषण का वीडियो वायरल होने के बाद एसआई गंगाराम बिंद के द्वारा शहर कोतवाली में तहरीर दी गई थी, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था. इस मुकदमे में विधानसभा चुनाव के दौरान अब्बास अंसारी को आरोपी बनाया गया था. अब्बास अंसारी ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था.

अधिकारियों की पोस्टिंग रोकने पर दिया था भाषण

अब्बास अंसारी द्वारा जनसभा के दौरान चुनाव के बाद अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग रोकने की बात कहीं गई थी साथ ही उनसे हिसाब किताब करने की भी बात मंच से कई गई थी. पुलिस ने इस मामले में विवेचना के बाद कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है. इस मामले में आरोपी विधायक अब्बास अंसारी और उनके भाई उमर अंसारी की ओर से अलग-अलग जमानत के लिए अर्जी दायर की गई थी. इस मामले में सुनवाई के बाद एमपी एमएलए कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. उन्होंने अपने आदेश में लिखा कि इस मुकदमे में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल हो चुका है. साथ ही अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एमपी एमएलए द्वारा इसका संज्ञान भी लिया जा चुका है और इसमें आरोपियों के खिलाफ समन भी निर्गत हो चुका है. साथ ही गिरफ्तारी की कोई संभावना नहीं है. यह कहते हुए अग्रिम जमानत की अर्जी को जज के द्वारा खारिज कर दिया गया.

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