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श्रीकांत त्यागी का मामला 42 साल पुराने 'माया त्यागी कांड' से क्यों जोड़ा जा रहा है?

नोएडा की एक सोसाइटी में महिला के साथ गाली-गलौज करने वाले श्रीकांत त्यागी के समर्थन में रविवार को पंचायत हुई, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए. श्रीकांत त्यागी के परिवार के साथ त्यागी समाज खड़ा नजर आ रहा है. वहीं, श्रीकांत त्यागी मामले को 42 साल पहले बागपत में हुए माया त्यागी कांड से भी जोड़ा जा रहा है.

श्रीकांत त्यागी के समर्थन में महापंचायत श्रीकांत त्यागी के समर्थन में महापंचायत
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 22 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 11:06 AM IST

नोएडा की ग्रैंड ओमैक्स सोसाइटी में महिला के साथ गाली-गलौज करने वाला श्रीकांत त्यागी फिलहाल जेल में है, लेकिन उसे लेकर सियासत तेज हो गई है. घटना के बाद से विरोध के जो सुर उठे तो वो थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. श्रीकांत त्यागी के पक्ष में रविवार को त्यागी समाज की महापंचायत नोएडा के गेझा गांव में हुई. वहीं, आरएलडी खुलकर श्रीकांत त्यागी के समर्थन में उतर गई है और पार्टी नेता त्रिलोकनाथ त्यागी ने तो इस मामले को 42 साल पहले हुए 'माया त्यागी कांड' से जोड़ दिया. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर क्या था 'माया त्यागी कांड', जिससे उस समय की सरकार हिल गई थी. 

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माया त्यागी कांड क्या है?

18 जून 1980 की तारीख यानी 42 साल पहले. गाजियाबाद निवासी ईश्वर त्यागी अपने दो साथियों राजेंद्र दत्त, सुरेंद्र सिंह और पत्नी माया त्यागी के साथ सफेद एंबेसडर कार से एक शादी समारोह में शामिल होने बागपत जा रहे थे. तभी रास्ते में कार पंक्चर हो गई. बागपत के चौपाल रेलवे क्रॉसिंग से पहले वह पंक्चर बनवाने के लिए रुके और अपने दोनों दोस्तों के साथ चाय की दुकान की तरफ चल दिए, लेकिन माया त्यागी कार में बैठी रहीं. इस दौरान वहां पर दो लोग आए और माया त्यागी से बदतमीजी करने लगे. ऐसे में ईश्वर त्यागी अपने दोस्तों के साथ दौड़कर कार के पास आए और दोनों युवकों को थप्पड़ मारकर भगा दिया. 
 
पंक्चर बनाने वाले दुकानकार ने ईश्वर त्यागी को बताया कि जिनसे झगड़ा हुआ है, वो बागपत थाने के स्टाफ हैं. इसमें एक सब इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह चौहान है, वो बहुत खतरनाक है. इसीलिए जितनी जल्दी हो यहां से निकल लीजिए. ईश्वर त्यागी फौरन निकलने लगे, लेकिन दुर्भाग्य से कार स्टार्ट नहीं हुई. कार को जब तक धक्का दिया जाता, तभी सब इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह चौहान ने 10-12 पुलिस वालों को साथ लाकर उन्हें घेर लिया. ईश्वर त्यागी, राजेंद्र दत्त और सुरेंद्र सिंह को गोली मार दी और ताकत के नशे में चूर नरेंद्र सिंह ने माया त्यागी को कार से बाहर घसीट लिया. 

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माया त्यागी के समर्थन में आंदोलन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नरेंद्र सिंह ने माया त्यागी के साथ सरेबाजार जोर जबरदस्ती की. नरेंद्र सिंह ने घटना को पुलिस एनकाउंटर बताया और सिंडिकेट बैंक को लूटने आए डकैतों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था. हालांकि, इस प्रकरण ने तूल पकड़ा और जन-आंदोलन शुरू हो गया. त्यागी समाज सड़क पर उतर आया था. 

घटना के विरोध में पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया, जिसमें समाजवादी नेता राज नारायण, मधु लिमये, मुलायम सिंह यादव और त्रिलोक त्यागी सरीखे कई बड़े नेता जेल गए थे. इस आंदोलन में हजारों नेताओं व कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारियां भी दी थीं. इस प्रकरण को लेकर नई दिल्ली के वोट क्लब पर विशाल धरना व प्रदर्शन भी किया गया था.

11 पुलिसकर्मी दोषी पाए गए थे

यूपी की तत्कालीन वीपी सिंह सरकार इस घटना से हिल गई थी. वीपी सिंह सरकार को न्यायिक व सीबीसीआईडी जांच का आदेश देना पड़ा. इसमें 11 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया और कोर्ट ने दो पुलिसकर्मियों को फांसी और 4 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. वहीं, मुख्य आरोपी नरेंद्र सिंह की घटना के कुछ ही दिन बाद हत्या हो गई थी. इसका आरोप  माया त्यागी के देवर विनोद त्यागी जो उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल था, उस पर लगा था. हालांकि वर्ष 2009 में विनोद त्यागी को नरेंद्र सिंह की हत्या के आरोप से कोर्ट ने बरी कर दिया गया था. 

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माया त्यागी बनाम श्रीकांत त्यागी

अब माया त्यागी मामले को लेकर आंदलोन करने वाले आरएलडी के महासचिव त्रिलोकनाथ त्यागी श्रीकांत त्यागी मामले में कूद गए हैं. पिछले दिनों वो नोएडा के ग्रैंड ओमैक्स सोसायटी पहुंचे. उन्होंने श्रीकांत त्यागी की पत्नी अनु त्यागी और उनके बच्चों से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उन्होंने श्रीकांत त्यागी के मामले में पुलिस, प्रशासन और सरकार पर हमला बोला और पूरे मामले को माया त्यागी कांड से जोड़ दिया. 

त्रिलोक त्यागी ने कहा कि पुलिस ने अन्नू त्यागी व उनकी मामी को न सिर्फ तीन दिनों तक पुलिस हिरासत में रखा बल्कि उन्हें गाड़ी में बिठाकर जगह-जगह ले जाकर परेशान किया. पुलिस ने उनके परिवार की महिलाओं से उत्पीड़न के मामले ने एक बागपत के माया त्यागी कांड की यादें ताजा कर दी हैं. वहीं, त्यागी समुदाय के लोगों ने रविवार को श्रीकांत त्यागी के समर्थन में महापंचायत की और कहा कि त्यागी समाज हमेशा बीजेपी को वोट करता है. इसके बाद भी सरकार ने जिस तरह से कार्रवाई की है, उससे त्यागी समुदाय को धक्का लगा है.

श्रीकांत त्यागी मामला क्या है?

बता दें कि नोएडा के ग्रैंड ओमैक्स सोसाइटी में श्रीकांत त्यागी का ग्राउंड फ्लोर पर फ्लैट है. श्रीकांत ने अपने फ्लैट के सामने अवैध निर्माण कर रहा था, जिसे लेकर सोसाइटी में रहने वाली महिला ने विरोध किया. ऐसे में श्रीकांत त्यागी का गाली-गलौज वाला वीडियो वायरल हुआ तब पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके अगले दिन जब कुछ लोगों ने सोसाइटी में जबरन प्रवेश किया और गाली-गलौज, पत्थरबाजी की घटना सामने आई और सोसाइटी के लोगों ने कुछ लड़कों को पकड़ लिया तो बवाल बड़ा हो गया.

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मामले में बीजेपी सांसद महेशा शर्मा मौके पर पहुंचे. उनका एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वह फोन पर अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी से पूरे मामले की शिकायत कर रहे हैं. सांसद के बयान का वीडियो वायरल हुआ तो शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मच गया. उसके बाद ताबड़तोड़ छापेमारी अभियान चलाया गया और श्रीकांत त्यागी सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने श्रीकांत त्यागी की पत्नी को भी उठाया था और श्रीकांत त्यागी की गिरफ्तारी के बाद उन्हें छोड़ना था. 

श्रीकांत के पक्ष में त्यागी समाज

श्रीकांत त्यागी फिलहाल जेल में है, लेकिन उसके बाकी साथियों को जमानत मिल गई. गिरफ्तारी के बाद श्रीकांत त्यागी की पत्नी अनु ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे दुर्व्यवहार किया. इसके बाद त्यागी समाज श्रीकांत त्यागी के पक्ष में उतर आया और  कहानी को त्यागी समाज से जोड़ दिया. पश्चिम उत्तर प्रदेश में त्यागी समाज का कई विधानसभा सीटों पर अच्छी संख्या मानी जाती है और पिछले कई चुनाव से ये वोट बैंक बीजेपी का करीबी माना जाता रहा है. त्यागी समाज के नेताओं ने पुलिस पर पक्षपाती कार्रवाई का आरोप लगाया और श्रीकांत त्यागी के परिवार को बेवजह प्रताड़ित करने का आरोप लगाया. 

त्यागी समाज के आंदोलन में पूर्वांचल के भूमिहारों का भी साथ मिला. गाजीपुर, मऊ, बलिया, देवरिया समेत कई जिलों के भूमिहारों ने नोएडा की तरफ कूच किया. कई लोगों का आरोप है कि उन्हें नोएडा जाने से रोक दिया गया. महापंचायत में आने वालों का तर्क एक ही है कि वो श्रीकांत त्यागी की गाली का समर्थन नहीं करते लेकिन परिवार की महिलाओं का जिस तरह पुलिस ने उत्पीड़न किया है उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. त्यागी समाज इस बहाने 6 राज्यों के अपने लोगों को जोड़ने में सफल रहा है.

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