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सपा नेता यूसुफ मलिक ने रामपुर कोर्ट में किया सरेंडर, सरकार पर लगाया आरोप

खुद को बेकसूर बताते हुए सपा नेता यूसफ़ मलिक ने कहा कि मुरादाबाद में एक अधिकारी द्वारा धमकाने और सरकारी काम मे बाधा डालने का मुकदमा दर्ज कराया गया है. सरकार उनकी है, जो चाहे कर सकते हैं. 

सपा नेता यूसुफ मलिक सपा नेता यूसुफ मलिक
आमिर खान
  • रामपुर,
  • 04 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 9:17 PM IST
  • गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद किया आत्मसमर्पण
  • कहा- सरकार उनकी है, जो चाहे कर सकते हैं

रामपुर में आलियागंज के किसानों की जमीन के दर्ज मुकदमे में अंतरिम जमानत पर चल रहे मुरादाबाद के सपा नेता यूसुफ मलिक ने आज रामपुर की सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया. यह मामला 2019 का है, जिसमें थाना अजीमनगर रामपुर में एक किसान ने धारा 147, 342, 307, 504, 506 के तहत धमकाने का मुकदमा दर्ज कराया था.

मामले में गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद, आज यूसुफ मलिक ने कोर्ट के सामने हाजिर होकर आत्मसमर्पण कर दिया. खुद को बेकसूर बताते हुए यूसुफ़ ने कहा कि मुरादाबाद में एक अधिकारी द्वारा धमकाने और सरकारी काम मे बाधा डालने का मुकद्दमा दर्ज कराया गया है. सरकार उनकी है, जो चाहे कर सकते हैं. 

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यूसुफ मलिक ने कहा कि आलिया गंज का धारा 307 का एक मामला था, जिसके तहत मैंने सरेंडर कर दिया है. उन्होंने कहा कि मुरादाबाद का एक मामला फर्जी केस है. अधिकारियों को धमकाने का मामला है, जबकि मैंने कोई बदतमीजी नहीं की है, उन्होंने ही मेरे साथ बदतमीजी की है. अब जबकि सरकार उन्हीं की है, सब कुछ उनका है, कलम उनकी है तो चाहे जो लिख दें. सच को झूठ लिखें, तो वह मालिक, झूठ को सच लिखे तो वह मालिक.'

यूसुफ मलिक के वकील नासिर सुल्तान ने कहा कि यह मामला 2019 का है. इसका क्राइम नंबर 421/2019 है और इसमें धाराएं हैं 147, 342, 307, 504 और 506. किसानों से संबंधित जो जमीन के मामले थे, उसमें एक किसान ने इनके खिलाफ धमकाने और जानलेवा हमला करने की FIR दर्ज कराई थी, लेकिन मामला फर्जी था. इस मामले पर चार्जशीट आ गई है इसलिए अब यूसुफ मलिक ने सरेंडर कर दिया है. मुरादाबाद में धारा 353 का एक केस अभी पिछले दिनों दर्ज हुआ है. 

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वकील ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन ने गलत तरीके से इनाम घोषित किया है, यह कोई इतना बड़ा मामला नहीं है. जहां तक मेरी जानकारी है, 353 में दो साल की सजा तक के मामले होते हैं. चूंकि मामला पॉलिटिकल है, इसलिए मामला हाईलाइट होता है और मामला जब हाईलाइट होता है, तो इनाम घोषित होता है. यह सब तो होता ही है, यह एक प्रक्रिया का हिस्सा है.

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