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यूपी: लापरवाही पर एक्शन, सीएम योगी ने दो उपायुक्तों को किया निलंबित

काम में उदासीनता और अनियमितता के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच और वाराणसी के उपायुक्त (स्वतः रोजगार) को निलंबित करने का आदेश दिया है. दोनों ही अधिकारियों के खिलाफ अब विभागीय जांच होगी. मुख्यमंत्री कार्यालय ने बुधवार को ट्वीट कर यह जानकारी दी.

सीएम योगी आदित्यनाथ (फोटो- पीटीआई) सीएम योगी आदित्यनाथ (फोटो- पीटीआई)
शिवेंद्र श्रीवास्तव
  • लखनऊ,
  • 04 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 6:03 PM IST
  • यूपी सरकार ने प्रदेश के दो उपायुक्तों को निलंबित किया
  • दायित्व निर्वहन में लापरवाही का आरोप
  • दोनों ही अधिकारियों के खिलाफ अब विभागीय जांच

सरकारी काम में उदासीनता और अनियमितता के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच और वाराणसी के उपायुक्त (स्वतः रोजगार) को निलंबित करने का आदेश दिया है. दोनों ही अधिकारियों के खिलाफ अब विभागीय जांच होगी. मुख्यमंत्री कार्यालय ने बुधवार को ट्वीट कर यह जानकारी दी.

वर्तमान में उपायुक्त स्वतः रोजगार के पद पर बहराइच में पदस्थ सुरेन्द्र कुमार गुप्ता पर आरोप है कि जनपद हरदोई के ब्लॉक अहिरोरी में खंड विकास अधिकारी रहते हुए इन्होंने ग्राम खाड़ाखेड़ा के आंगनबाड़ी केन्द्र के स्थलीय विवाद होने पर न तो कोई कार्य कराया और न ही किसी फर्म से किसी भी निर्माण सामग्री की आपूर्ति ली.

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यही नहीं कोई मापाकंन भी नहीं कराया गया. बावजूद इसके भुगतान की कार्यवाही की गई. इस प्रकार सुरेन्द्र गुप्ता ने न केवल काम में लापरवाही की, बल्कि शासकीय धन का अनियमित तरीके से भुगतान भी किया. मुख्यमंत्री ने इसे घोर अनुशासनहीनता, लापरवाही और स्वेच्छाचारिता माना है.

निलंबन का आदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के भी आदेश दिए हैं. संयुक्त विकास आयुक्त, लखनऊ मण्डल को इस मामले में जांच अधिकारी बनाया गया है. निलंबन अवधि में निलंबित अधिकारी ग्राम्य विकास, लखनऊ से संबद्ध रहेंगे.

इसी तरह सुरेश चन्द्र केसरवानी, उपायुक्त स्वतः रोजगार, वाराणसी पर राज्य ग्रामीण आजिविका मिशन के कार्यों में शिथिलता बरतने का आरोप है.

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केसरवानी के खिलाफ अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ अशोभनीय भाषा का प्रयोग और उन्हें धमकाने की शिकायत भी मिली है. बीते दिनों मुख्य विकास अधिकारी, वाराणसी ने इनके कार्यालय का निरीक्षण किया था, जहां कामकाज और अनियमितता से संबंधित शिकायतें सामने आई थीं. केसरवानी की उदासीनता के कारण दिसम्बर 2019 तक के लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका.  

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इसके अलावा सुरेश चन्द्र केसरवानी को जून 2019 में  विकास खंड हरहुआ का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था, जिसके निर्वहन में भी केसरवानी ने लगातार उदासीनता बनाए रखी. मुख्यमंत्री ने अब इन्हें निलंबित कर इनके विरुद्ध विभागीय जांच कराने का आदेश दिया है. 

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