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यूपी पंचायत चुनाव: 3500 रुपये की सैलरी वाला पंच बनने के लिए क्यों मचा है घमासान?

लोकतंत्र की पहली इकाई पंचायत चुनाव होते हैं, जिसमें ग्रामीण इलाके के मतदाता अपने गांव के जनप्रतिनिधि का चुनाव करते हैं. उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइल माना जा रहा है. ऐसे में हम बताएंगे कि पंचायत चुनाव कैसे होते हैं और गांव के प्रधान के क्या अधिकार होते हैं? 

मतदाता मतदाता
aajtak.in
  • नई दिल्ली ,
  • 15 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 1:46 PM IST
  • यूपी में पंचायत चुनाव के पहले चरण की वोटिंग
  • यूपी में ग्राम प्रधान बनने की क्या प्रक्रिया है
  • यूपी में ग्राम प्रधान को 3500 रुपये सैलरी मिलती है

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के पहले चरण की वोटिंग हो रही है, जिसके तहत जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य के लिए चुनाव हो रहे हैं. लोकतंत्र की पहली इकाई पंचायत चुनाव होते हैं, जिसमें ग्रामीण इलाके के मतदाता अपने गांव के जनप्रतिनिधा का चुनाव करते हैं. उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइल माना जा रहा है. ऐसे में हम बताएंगे कि पंचायत चुनाव कैसे होते हैं और गांव के प्रधान के क्या अधिकार होते हैं? 

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उत्तर प्रदेश में कुल 58,189 ग्राम पंचायत है, जहां ग्राम प्रधान चुने जाते हैं. इसके साथ ही  7, 32, 563 ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव  होता है. यूपी में क्षेत्र पंचायत सदस्य के पद जिसे बीडीसी सदस्य भी कहा जाता है,की संख्या 75, 855 है. इन बीडीसी सदस्यों के जरिए ब्लाक प्रमुख का चुनाव होता है. यूपी में 826 ब्लाक प्रमुख के पद हैं. ऐसे ही यूपी के सभी 75 जिलों में 3051 जिला पंचायत सदस्य के चुनाव हो रहे हैं, जिनके द्वारा बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होगा. सूबे भर में 75 जिला पंचायत अध्यक्ष को जिला का प्रथम नागरिक कहा जाता है. 

क्या कोई भी प्रधान बन सकता है?
गांव का प्रधान बनने के लिए चुनाव लड़ना पड़ता है. चुनाव लड़ने के लिए जरूरी है कि कैंडिडेट की उम्र कम से कम 21 साल हो और साथ ही वह उसी गांव का रहने वाला हो और वोटर लिस्ट में उसका नाम हो. वह सरकारी नौकरी न कर रहा हो और पागल व दिवालिया न हो. उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए ग्राम प्रधान पद और बीडीसी प्रत्याशी को नामांकन पत्र के लिए 300 रुपये और दो हजार रुपये जमानत राशि देनी होगी. जिला पंचायत सदस्य के लिए 500 रुपये नामांकन पत्र और 4000 रुपये जमानत राशि देनी होगी. 

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पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था

पंचायत चुनाव में जातीय आरक्षण की व्यवस्था भी है, जिसके तहत 27 फीसदी ओबीसी, 21 फीसदी एससी और एक फीसदी एसटी समुदाय के आरक्षण की व्यवस्था है और बाकी सामान्य वर्ग के लिए हैं. इन सभी वर्गों में 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं. ये आरक्षण व्यवस्था त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था में है. ये रोस्टर के लिहाज से आरक्षण की सीटें बदलती रहती हैं,

ऐसे में ग्राम प्रधान की सीट आरक्षित है तो कोई अपनी दावेदारी पेश कर रहा है तो इसका आरक्षित सीट के लिए  सर्टिफिकेट उसके पास हो. एक तरह से सीट अगर पिछले वर्ग के लिए आरक्षित है तो ओबीसी का प्रमाणपत्र हो और ऐसे ही अगर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो तो उसके पास अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र चाहिए होगा. 

ग्राम प्रधान चुनाव लड़ने की योग्यता

यूपी में चुनाव लड़ने की कोई शैक्षणिक योग्यता तय नहीं है, लेकिन कई राज्यों ने अपने यहां प्रधानी के चुनाव में शैक्षिक योग्यता जैसे आठवीं या हाईस्कूल पास या बच्चों को लेकर कुछ सीमाएं तय की हैं. जैसे की कोई ग्राम प्रधान का चुनाव वही लड़ सकता है जिसके दो से ज्यादा बच्चे न हों. ऐसे कई राज्य है, लेकिन यूपी में ऐसा कोई नियम नहीं है. 

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गांव प्रधान का काम क्या होता है?
ग्राम प्रधान का काम गांव का विकास करना. गांव की सड़कों और शौचालय का निर्माण कराना, पानी निकासी की व्यवस्था करना. गांव वालों के पशुओं के पीने के पानी की व्यवस्था करना. किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए सरकारी ट्यूबवेल की व्यवस्था, नालियों की साफ-सफाई का काम. ग्राम पंचायत के सार्वजनिक स्थान, जैसे मंदिर, मस्जिद आदि स्थानों पर लाइट की व्यवस्था करना. पंचायत में अलग-अलग धर्म व समुदाय के लोगों के लिए दाह संस्कार स्थल और कब्रिस्तान की देख-रेख का काम. कब्रिस्तान की चारदीवारी का निर्माण भी ग्राम प्रधान को कराना होता है.

ग्राम प्रधान के ऊपर ग्राम पंचायत में जन्म मृत्यु विवाह आदि का रिकॉर्ड रखना, जिससे जनगणना जैसे कामों में आसानी हो. शिक्षा के अधिकार के तहत एक से लेकर आठवीं तक बच्चों की शिक्षा की मुफ्त व्यवस्था करना. ग्राम पंचायत स्तर पर बच्चों, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की होती है. वो काम कर रही हैं कि नहीं, सभी को पोषाहार मिल रहा है कि नहीं ये सब देखने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होती है. साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को गांवों में लागू कराना भी ग्राम प्रधान का अहम काम है. ग्राम प्रधान ये सारे ग्राम पंचायत अधिकारी के साथ मिलकर करता है. 

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ग्राम सभा का बजट
ग्राम सभा का बजट गांव की आबादी और क्षेत्रफल के आधार पर तय होता है. पंचायती राज व्यवस्था के तहत एक छोटा गांव है तो दो-तीन लाख का बजट एक साल का आता है, कुछ अलग से आ गया तो पांच लाख तक हो जाता है. बड़े गांवों के लिए हर साल 10 से 15 लाख तक का बजट हो जाता है. गांव के विकास के लिए बजट केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा दिए जाते हैं. इनमें मनरेगा और गरीबी उन्मूलन समेत कई योजनाएं शामिल नहीं हैं. एक तरह से औसतन हर पंचायत को 7 से 10 लाख रुपये मिलते हैं.

प्रधानों की 3500 रुपये सैलरी 
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में प्रधानों का मानदेय 3500 रुपये मिलता है. हालांकि, पहले 1000 था, फिर 2500 हुआ अब 3500 है. ऐसे में कुछ प्रधान मानदेय को 10 हजार रुपये करने की मांग कर रहे हैं. 

 

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