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यूपी पंचायत चुनावः जौनपुर में बीवी-बहू-बेटियों को मैदान पर उतार जंग लड़ रहे दिग्गज

जौनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है, जिसके चलते कई दिग्गजों नेताओं ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी है. किसी ने अपनी पत्नी तो किसी ने अपनी बहू को और किसी ने अपनी बेटी को ही चुनावी मैदान में उतार रखा है. ऐसे में जौनपुर का जिला पंचायत सदस्य का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है. 

दिक्षा सिंह, श्रीकला रेड्डी, उर्वशी सिंह दिक्षा सिंह, श्रीकला रेड्डी, उर्वशी सिंह
कुमार अभिषेक
  • लखनऊ,
  • 13 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 11:33 AM IST
  • धनजंय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी की साख दांव पर
  • परसनाथ यादव की बहू उर्वशी सिंह चुनावी मैदान में
  • फिल्म अभिनेत्री दीक्षा सिंह सियासत में आजमा रही किस्मत

पूर्वांचल के जौनपुर जिले में 15 अप्रैल को पंचायत चुनाव की वोटिंग होनी है. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत जिले में हो रहे जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में सदस्य का पद कम, जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अधिक मायने रख रही है. इस बार जौनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है, जिसके चलते कई दिग्गजों नेताओं ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी है. किसी ने अपनी पत्नी तो किसी ने अपनी बहू को और किसी ने अपनी बेटी को ही चुनावी मैदान में उतार रखा है. ऐसे में जौनपुर का जिला पंचायत सदस्य का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है. 

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जौनपुर जिला पंचायत के कुल 83 सदस्य पदों के लिए 1272 उम्मीदवार मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण दर्जन भर से अधिक जिला पंचायत सदस्य की सीटों पर दिग्गज राजनेताओं के घर की महिलाओं के उतरने से चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है. इसमें कई पूर्व सांसदों और विधायक सहित तमाम दिग्गज नेताओं की घर की महिलाएं जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने के लिए पसीना बहा रही हैं.

दिग्गज नेताओं के घर महिलाएं आजमा रहीं किस्मत
पूर्व मंत्री दिवंगत सपा नेता पारसनाथ यादव के छोटे पुत्र वेद यादव की पत्नी लंदन रिटर्न उर्वशी सिंह यादव चुनावी रण में उतरी हैं. उर्वशी सिंह ने M-tech और IIM बेंगलुरु से एमबीए करने के बाद लंदन में 5 साल नौकरी की. पारसनाथ यादव की छोटी बहू बनकर पंचायत चुनाव में किस्मत आजमा रही हैं. ट्रांसपोर्ट कारोबारी जितेंद्र सिंह की बेटी पूर्व मिस इंडिया 2015 की रनर अप व अभिनेत्री दीक्षा सिंह, पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी, प्रतापगढ़ से पूर्व सांसद हरिवंश सिंह की बहू नीलम सिंह और मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष रहे राजबहादुर यादव की पत्नी राजकुमारी यादव और पूर्व सांसद अर्जुन यादव की बहू अनीता यादव किस्मत आजमा रही हैं. 

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वहीं, शाहगंज नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष बीजेपी नेता ओम प्रकाश जायसवाल की पत्नी माधुरी जायसवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कमला सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती यादव की बहू, राज्य सूचना आयुक्त सुबास चंद्र सिंह की बहू शालिनी सिंह, बीजेपी नेता प्रबुद्ध दुबे की पत्नी बिदू दुबे के सदस्य पद के लिए मैदान में उतरने से अध्यक्ष पद के लिए दिलचस्प मुकाबले के आसार नजर आने लगे हैं. 

बहुबली धनजंय सिंह की साख दांव पर
पूर्व सांसद बहुबली धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी मूल रूप से आंध्रप्रदेश की हैं. धनजंय सिंह जौनपुर में अपनी सियासी वजूद को बनाए रखने के लिए इस बार उन्होंने जिला पंचायत सदस्य के पद पर अपनी पत्नी को उतारा है ताकि जिले की प्रथम महिला का खिताब अपने नाम कर सकें. हालांकि, श्रीकला रेड्डी को खुद चुनावी मैदान में उतरकर वोट मांगने पड़ रहे हैं, क्योंकि उनके पति धनजंय सिंह, अजित सिंह हत्याकांड में नाम आने के चलते दिख नहीं रहे हैं. 

अभिनेत्री से नेता बनी दीक्षा सिंह 
वहीं, एक साल से जौनपुर में अपनी सियासी राह तलाशने में जुटे कारोबारी जितेंद्र सिंह ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी महिला हो जाने के चलते अपनी बेटी दीक्षा सिंह को बख्सा ब्लॉक की सीट से उतारा हैं. दीक्षा सिंह 2015 में पूर्व मिस इंडिया की रनर-अप हैं और कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं. हालांकि, अपने पिता की राजनीतिक ख्वाहिश के लिए चुनावी किस्मत आजमा रही हैं और गली-गली व गांव-गांव घूम घूमकर वोट मांग रही हैं. 

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कारोबारी और पूर्व सांसद की बहू मैदान में
मुंबई में रियल स्टेट के बड़े कारोबारी और प्रतापगढ़ सीट से सासंद रहे हरबंश सिंह अपने गृह जनपद जौनपुर में अपने सियासी वजूद को कायम करने के लिए अपनी बहू नीलम सिंह को बीजेपी के टिकट पर खुटहन सीट से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा रहे हैं. हालांकि, खुटहन ब्लाक सीट पर हरिबंश सिंह ने सपा के सियासी वर्चस्व को तोड़ते हुए ब्लाक प्रमुख सीट पर अपने बेटे रमेश सिंह को काबिज कराया था. माना जाता है कि यूपी का सबसे महंगा ब्लॉक प्रमुख चुनाव हुआ था. ऐसे ही दूसरे दिग्गज नेताओं की साख भी दांव पर लगी हुई है. 

सपा-बसपा नेता ही जिला पर काबिज होते रहे
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की व्यवस्था लागू होने के बाद जौनपुर जिल की प्रथम नागरिक वाले इस प्रतिष्ठित पद पर पहली बार 1995 में बीजेपी की कमला सिंह का कब्जा था, लेकिन इसके बाद से कभी बसपा तो कभी सपा से जुड़े उम्मीदवार ही चुनाव जीतते रहे. बीजेपी 1995 के बाद दोबारा से वापसी नहीं कर सकी है. इस बार मोदी-योगी युग में केंद्र व प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी से जुड़े दावेदारों की उम्मीदें कुलाचे मार रही हैं, उन्हें लगता है कि इस बार सत्ता में होने के चलते उनकी लॉटरी लगनी तय है. 

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जौनपुर जिला पंचायद सदस्य पद के सभी 83 वार्डों से बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों में महिला प्रत्याशियों की अच्छी खासी तादाद है. इसके अलावा सपा, बसपा, कांग्रेस और अपना दल (एस) ने भी पार्टी समर्थित प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर इस सदस्य पद के चुनाव में सीधा दखल दिया है. ऐसे में देखना होगा कि जिले में इस बार जिन दिग्गज नेताओं ने अपनी घर की महिलाओं को चुनावी रण में उतारा है, उनमें से किसी नैया पार लगती है और जिले की प्रथम महिला का खिताब कौन अपने नाम करता है? 

 

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