
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने चुनाव लड़ने के लिए अपने बेटे की शादी खरमास के महीने में करा दी. दरअसल ये फैसला पूर्व जिला पंचायत सदस्य को आरक्षण की नई सूचना आने के बाद लेना पड़ा, जिसमें ये सीट महिला के लिए आरक्षित कर दी गई. वहीं घर में आई नई नवेली दुल्हन को चुनाव मैदान में उतार दिया गया. बसपा ने भी नई दुल्हन को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया है. अब नई दुल्हन मुंह दिखाई में वोट मांग रही हैं.
जौनपुर जिले के खुटहन विकासखंड अंतर्गत उसरौली गांव के भैयाराम का पुरवा निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुभाष यादव वार्ड नंबर-17 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. इसके लिए उन्होंने चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था, लेकिन इस बीच हाई कोर्ट के आदेश पर बदली आरक्षण व्यवस्था में यह सीट पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित हो गई.
इस आदेश के बाद सुभाष यादव को बड़ा झटका लगा, क्योंकि उनकी पत्नी आंगनबाड़ी में हैं, वो चुनाव लड़ नहीं सकतीं और मां का पहले ही देहांत हो चुका है. ऐसे में उनके सामने चुनाव लड़ने का कोई विकल्प नहीं था.
31 मार्च को हुई शादी
सुभाष यादव ने पहले पत्नी का आंगनबाड़ी से त्याग पत्र दिलाकर चुनाव मैदान में उतारने का फैसला लिया, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई. जिसके बाद सुभाष ने अपने पुत्र सौरभ यादव का विवाह करने का फैसला लिया. उनके बेटे की पहले से कहीं से शादी की चर्चा चल रही थी. वहां पर शादी के लिए प्रस्ताव भेजा गया कि तत्काल शादी करनी है, लेकिन खरमास की वजह से लड़की के परिवार ने शादी करने से इंकार कर दिया.
इस बीच पड़ोस के गांव के रहने वाले रामचंद्र यादव अपनी पुत्री अंकिता का विवाह प्रस्ताव लेकर सुभाष यादव के पास पहुंच गए, जिस पर दोनों परिवारों की सहमति बन गई.
इसके बाद 31 मार्च को एक मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ दोनों का विवाह करा दिया गया. शादी के बाद घर में आई नई दुल्हन अंकिता यादव का रविवार को वार्ड नंबर 17 से जिला पंचायत सदस्य के लिए नामांकन दाखिल कराया गया. अंकिता को बसपा ने अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया है, जिसके बाद अब अंकिता चुनाव मैदान में उतर चुकी हैं. ( Input-राजकुमार सिंह)