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कोरोना: मेडिकल इक्विपमेंट खरीद में घोटाले पर CM योगी का एक्शन, बनाई गई SIT

सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुल्तानपुर, गाजीपुर, बिजनौर, बाराबंकी सहित कुछ अन्य जनपदों की कतिपय ग्राम पंचायतों में पल्स ऑक्सीमीटर और इन्फ्रारेड थर्मामीटर की बाजार मूल्य से अधिक दर पर खरीद किए जाने की एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो-PTI) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो-PTI)
कुमार अभिषेक
  • लखनऊ,
  • 10 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 3:14 PM IST
  • योगी सरकार ने गठित की SIT
  • रेणुका कुमार की अगुवाई में SIT
  • 10 दिन के अंदर सौेपेंगी जांच रिपोर्ट

मेडिकल इक्विपमेंट खरीद में घोटाले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी कार्रवाई की है. सीएम योगी ने सुल्तानपुर, गाजीपुर, बिजनौर, बाराबंकी सहित कुछ अन्य जनपदों की कतिपय ग्राम पंचायतों में पल्स ऑक्सीमीटर और इन्फ्रारेड थर्मामीटर की बाजार मूल्य से अधिक दर पर खरीद किए जाने की एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं.

योगी सरकार ने अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया है. इस एसआईटी में आईएएस अमित गुप्ता और आईएएस विकास गोठलवाल भी शामिल हैं. एसआईटी पूरे प्रकरण की जांच कर 10 दिन में अपनी आख्या शासन को प्रस्तुत करेगी. कई जिलों में थर्मामीटर और ऑक्सीमीटर का खरीद को लेकर घोटाले का आरोप है.

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इससे पहले योगी सरकार ने सुल्तानपुर और गाजीपुर के जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) पर गाज गिरा दी. अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार सिंह ने दोनों डीपीआरओ को निलंबित कर दिया. दोनों डीपीआरओ पर बाजार से बहुत महंगे रेट पर पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर की खरीद करने के आरोप हैं.

गौरतलब है कि पिछले दिनों सुल्तानपुर के लंभुआ से बीजेपी विधायक देवमणि द्विवेदी ने कोरोना किट खरीद में घोटाले के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी. इसकी जांच अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह को सौंपी थी. मनोज कुमार सिंह ने प्रारंभिक तौर पर मार्केट रेट से ज्यादा दर पर खरीद करने के आरोप को सही माना था.

इस मामले में अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार सिंह ने कहा था कि गाजीपुर और सुल्तानपुर के डीपीआरओ को निलंबित कर दिया गया है. सभी जिलों से खरीद के संबंध में सूचनाएं मांगी गई है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर का भुगतान 2800 रुपये से ज्यादा न किया जाए.

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