
उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के किनारे शवों को दफनाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. धार्मिक महत्व रखने वाले प्रयागराज में गंगा नदी के किनारे रेत में शवों को लगातार दफनाया जा रहा है. महीनेभर में सैकड़ों शवों को इन किनारों पर दफनाया जा चुका है. शवों को दफनाने के बाद उसके आसपास बांस लगा दिए जा रहे हैं ताकि लोग पहचान सकें कि यहां शव को दफनाया गया है.
हिंदू धर्म में कुछ परिस्थितियों को छोड़कर शवों के दाह संस्कार की परंपरा है, लेकिन यहां शवों को दफनाने का सिलसिला जारी है. वहीं, प्रशासन का दावा है कि यहां शवों को दफनाना पुराना रिवाज है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के बीच यहां शवों के दफनाने की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे कई सवाल भी खड़े होते हैं. इन शवों के आसपास कपड़ों के अलावा कुछ दवाइयां भी पड़ी हुई हैं, जो इस ओर इशारा कर रही हैं कि इनकी मौत कोरोना संक्रमण से ही हुई होगी.
आजतक से बात करते हुए 50 साल के पुजारी जयराम ने बताया कि पिछले हफ्ते तक यहां रोजाना 8 से 10 शव आ रहे थे, लेकिन मीडिया में खबरें आने के बाद ये सिलसिला बंद हो गया है. शवों को गंगा किनारे दफनाने को लेकर प्रशासन भी सतर्क हो गया है. उन्होंने बताया कि रेत के नीचे शवों को दफनाने एक पुरानी प्रथा रही है, लेकिन पिछले दिनों से शवों की संख्या में बढ़ोतरी होना निश्चित रूप से महामारी का संकेत है.
वहीं, यहां रहने वाले 55 वर्षीय शंकर प्रसाद बताते हैं कि उन्होंने कभी भी यहां इतनी संख्या में शवों को आते नहीं देखा. वो कहते हैं कि प्रशासन के संज्ञान लेने के बाद शवों की संख्या में कमी आई है, लेकिन इससे पहले कभी भी यहां इतनी ज्यादा संख्या में यहां शवों को आते नहीं देखा है.
दूसरी ओर प्रशासन इसे पुराना रिवाज बताने पर अड़ा हुआ है. प्रयागराज के आईजी केपी सिंह ने आजतक से बातचीत में कहा कि "जिन लोगों की कोरोना से मौत हो रही है, उनका अंतिम संस्कार प्रयागराज के फाफामऊ घाट पर किया जा रहा है." वो बताते हैं कि उन्होंने नदी के किनारों पर पैट्रोलिंग के लिए पुलिसकर्मी, वॉटर पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात कर दिया है, ताकि कोई भी शवों को गंगा या यमुना नदी में प्रवाह न करे.
उन्होंने ये भी बताया कि टीमें चटनाग, फाफामऊ और श्रृंगवेरपुर घाट पर चौबीसों घंटे गश्त कर रही हैं और कड़ी निगरानी रखे हुए हैं. उन्होंने बताया कि जिन शवों को दफनाया गया है, उन्हें डिकम्पोज करने के लिए प्रशासन दूसरे विकल्प के बारे में विचार कर रहा है.