
Martand Shahi Murder Case: वाराणसी (Varanasi) में एनटीपीसी (NTPC) के रिटायर्ड अधिकारी के मर्डर में पुलिस (UP Police) ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. वाराणसी पुलिस के द्वारा दाखिल की गई 94 पेज की चार्जशीट में सीसीटीवी, गवाहों के बयान, सीडीआर रिपोर्ट को भी बतौर सुबूत लगाया है.
कैसे करोड़ों की संपत्ति के लालच में मार्तंड शाही का पहले अपहरण किया गया? फिर उनकी हत्या को आत्महत्या बताने की कोशिश की गई. यहां तक कि इस मामले में भाई और बेटे को फंसाने की साजिश भी रची गई. ये सारी बातें पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बताई हैं.
7 अगस्त 2021 को वाराणसी के कैंट इलाके की बुद्धविहार कॉलोनी में रहने वाले मार्तंड शाही अपनी नातिन से मिलने के लिए निगमेंद्र सिसोदिया कानपुर ले गया था. 8 अगस्त को मार्तण्ड शाही का शव कानपुर के नौबस्ता इलाके में बरामद हुआ.
शव की जेब से पहले से लिखा सुसाइड नोट, नशीली गोलियां बरामद हुई और बस का टिकट भी मिला. पुलिस को इस मामले में बेटी और दामाद के मोबाइल पर फॉरवर्ड हुआ एक सुसाइड नोट भी मिला. जिसमें मार्तंड ने अपने बेटे और दामाद से परेशान होकर आत्महत्या करने के बात लिखी थी.
वाराणसी पुलिस ने केस दर्ज करने के 2 दिन में ही आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी थी. मुकदमा दर्ज होने के 90 दिन से पहले ही सभी आठ आरोपियों के खिलाफ 94 पन्ने की चार्जशीट दाखिल कर दी है. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कुल 65 गवाहों के बयान दर्ज किए जिसमें 3 गवाहों के कलम बंद बयान भी शामिल हैं.
इस हत्याकांड के खुलासे के लिए वाराणसी पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस की ऐसी कड़ी को आपस में जोड़ा जिसके आधार पर आत्महत्या नजर आने वाली मार्तंड शाही की मौत एक सोची समझी साजिश के तहत हत्या साबित हुई. घटना में राजेश चौहान, कंचन चौहान, अखिलेश ठाकुर, रामप्रवेश तिवारी, निगमेंद्र चौहान समेत सभी 8 आरोपियों के खिलाफ 94 पन्ने की चार्जशीट दायर हुई है.
ऐसे रची गई साजिश
मार्तंड शाही की हत्या के लिए हत्यारों ने बेहद शातिराना ढंग से साजिश रची थी. जनवरी 2021 से ही खुद को साधु बताने वाले राजेश चौहान ने मार्तण्ड शाही की करोड़ों की संपत्ति दान में अपने नाम करना शुरू कर दिया था. दरअसल, एनटीपीसी के रिटायर्ड अफसर मार्तंड शाही की वाराणसी के सबसे पॉश इलाके में आलीशान कोठी और देवरिया में करीब 100 एकड़ से अधिक की खेती थी.
करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा करने की नियत से ही प्लान तैयार किया गया. जिसमें मार्तंड शाही को पहले ढोंगी राजेश चौहान ने बाबा बनकर अपने झांसे में लेकर करोड़ो की कोठी, संपत्ति अपने नाम दान करवा ली. इसके बाद 26 लाख की स्टाम्प ड्यूटी देकर रजिस्टर्ड करवाया.
फिर प्लानिंग के तहत एक बिज़नेस डील के नाम पर मार्तंड शाही को 7 अगस्त को कानपुर ले जाया गया. इतना ही नहीं, आरोपियों ने इनोवा से कानपुर लेकर गए मार्तंड शाही की जेब मे रोडवेज की बस का टिकट रख दिया. जेब में एक फर्जी सुसाइड नोट रख दिया.