यमुना के तट पर सोलह शृंगार किए हुए श्री राधा रानी के प्रिय रास बिहारी ने जैसे ही कदम रखा कि उनकी प्रियतमा की पायल से स्वत: झनकार होने लगी। गोपियों के कदम थिरकने लगे मंद-मंद बयार बहने लगी और चारों ओर कमल और भ्रमर गुंजायमान होने लगे.