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चमोली आपदाः लापता लोगों को मृत घोषित करने की प्रक्रिया शुरू, सरकार ने उठाए कदम

सात फरवरी को चमोली जिले में आई आपदा में लापता हुए लोगों को मृत घोषित करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है. इसके बाद अब लापता लोगों क परिजनों को मुआवजा मिलने में आसानी हो सकेगी.

सात फरवरी को चमोली में आई थी आपदा (फोटो-PTI) सात फरवरी को चमोली में आई थी आपदा (फोटो-PTI)
दिलीप सिंह राठौड़
  • देहरादून,
  • 23 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 5:15 PM IST
  • सात फरवरी को चमोली में आई थी आपदा
  • उत्तराखंड सरकार ने अधिसूचना जारी की
  • तीन श्रेणियां बनाकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी

सात फरवरी को चमोली जिले में आई आपदा में लापता हुए लोगों को मृत घोषित करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है. इसके बाद अब लापता लोगों के परिजनों को मुआवजा मिलने में आसानी हो सकेगी.

उत्तराखंड सरकार के आग्रह पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. चमोली जिले के तपोवन में सात फरवरी को आई भीषण आपदा में लापता लोगों को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए केंद्र से मिले दिशानिर्देशों पर राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है. 

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लापता लोगों की तीन श्रेणियां बनाकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की कार्रवाई की जाएगी. 30 दिन के भीतर दावों और आपत्तियों का समाधान किया जाएगा. इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों के परगना, मजिस्ट्रेट या उप जिलाधिकारी को अपीलीय अधिकारी नामित किया गया है.

बनेंगी तीन श्रेणियां

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार चमोली आपदा में लापता लोगों के तीन श्रेणियों में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. इसमें पहली श्रेणी आपदा प्रभावित क्षेत्र के स्थायी निवासी, दूसरी श्रेणी प्रदेश के अन्य जिलों के निवासी जो आपदा के समय प्रभावित क्षेत्र में थे. तीसरी श्रेणी में दूसरे राज्यों के पर्यटक या लोग शामिल हैं. 

क्या होगी प्रक्रिया

मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आपदा में लापता लोगों के परिजनों या अन्य उत्तराधिकारी की ओर से नोटरी शपथ पत्र के साथ निवास के मूल जनपद में लापता होने या मृत्यु होने पर FIR प्रस्तुत की जाएगी.
 
यदि इस तरह की रिपोर्ट आपदा प्रभावित क्षेत्र में पूर्व से ही पंजीकृत की गई है तो अधिकारी एसडीएम की ओर से रिपोर्ट को जांच के लिए लापता व्यक्ति के मूल जिले के एसडीएम को भेजा जाएगा.  

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दूसरे राज्यों के लापता लोगों के परिजनों की ओर से अपने राज्य में घटना के 15 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए. साथ ही लापता व्यक्ति सात फरवरी से पहले प्रभावित क्षेत्र की यात्रा पर रहा हो. 

समस्त दस्तावेजों की जांच और आपत्तियों का समाधान करने के बाद प्रभावित क्षेत्र के अधिकारी एसडीएम की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे.

 

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