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चमोली त्रासदीः अगले दो दिन बारिश न होने का अनुमान, रेस्क्यू में मिलेगी राहत

सेन्ट्रल वाटर कमीशन ने जानकारी दी है कि आसपास के गांव को खतरा नहीं है. जल स्तर घट रहा है. NDRF की टीम, इंडियन नेवी की टीम, आर्मी और अन्य रेस्क्यू एजेंसीज अपने काम में लग गई हैं.

ग्लेशियर फटने से उत्तराखंड में आई आपदा (फाइल फोटो) ग्लेशियर फटने से उत्तराखंड में आई आपदा (फाइल फोटो)
कमलजीत संधू
  • चमोली,
  • 07 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 8:58 PM IST
  • अब तक एनडीआरएफ की 5 टीमें भेजी जा चुकी हैं
  • अगले 2 दिनों तक कोई बारिश नहीं होगी-मौसम विभाग
  • निचले क्षेत्र में बाढ़ का अधिक खतरा नहीं है
  • लगातार कम हो रहा है जल स्तर

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने की प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकार की पूरी मशीनरी मिशन मोड में जुट गई है. नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट कमिटी (NCMC) ने चमोली ग्लेशियर आपदा पर एक रिव्यू मीटिंग की है. नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी की बैठक में सेंट्रल वॉटर कमीशन ने जानकारी दी कि नदी का जल स्तर कम हो रहा है.

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सेंट्रल वाटर कमीशन(CWC) ने जानकारी दी है कि नीचे के क्षेत्रों में बाढ़ का अधिक खतरा नहीं है. हालांकि आसपास के गांव में बाढ़ का खतरा बना हुआ है. केंद्र सरकार ने नेवी के गोताखोरों को भी उत्तराखंड भेजा है, जिससे कि नदी में फंसे लोगों का बेहतर तरीके से रेस्क्यू किया जा सके. अब तक एनडीआरएफ की 5 टीमें भेजी जा चुकी हैं. सेंट्रल वाटर कमीशन ने NCMC को जानकारी दी कि आसपास के गांव को खतरा नहीं है.

मौसम विभाग ने भी नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी को जानकारी दी है कि 2 दिनों तक कोई बारिश नहीं होगी, इसलिए रेस्क्यू में किसी भी तरीके की दिक्कत नहीं आएगी. साथ ही आसपास के जो पड़ोसी गांव हैं उनको भी वाटर लेवल बढ़ने से कोई नुकसान अब नहीं होगा, निचले गांव में बाढ़ का खतरा नहीं है क्योंकि जल स्तर लगातार घट रहा है.

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आपको बता दें कि ग्लेशियर फटने की घटना के कारण ऋषिगंगा नदी का जल स्तर काफी अधिक बढ़ गया था जिसके कारण ऋषिगंगा नदी पर स्थित 13.2 मेगावाट का हाइड्रो प्रोजेक्ट भी बह गया. ग्लेशियर फटने से आई बाढ़ के कारण धौलीगंगा पर स्थित NTPC का हाइड्रो प्रोजेक्ट भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. धौलीगंगा अलकनंदा नदी की सहायक नदी है.

इस पूरी आपदा पर नजर बनाए रखने के लिए राज्य और केंद्र की संबंधित एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है. DRDO की एक टीम भी हिमस्खलन पर नजर बनाए रखने के लिए भेजी गई है. NTPC के MD को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने के लिए कहा गया है.

 

 

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