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'जाम में फंसता हूं तो एस्कॉर्ट सुविधा याद आती है', अब पूर्व CM हरीश रावत ने उठाया प्रोटोकॉल का मुद्दा

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा के सभी नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों को विशेष एस्कॉर्ट सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जबकि उन्हें आवश्यकता पड़ने पर भी यह सुविधा नहीं मिल रही है.

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत  (फोटो: पीटीआई) उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (फोटो: पीटीआई)
अंकित शर्मा
  • देहरादून,
  • 26 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 3:48 PM IST

पूर्व मुख्यमंन्त्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत द्वारा अपनी सुरक्षा को लेकर लिखे गए पत्र के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का फेसबुक पोस्ट चर्चा में है. सोशल मीडिया पर अपनी एक पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लिखा, "दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें राज्य के प्रोटोकॉल अधिकारी की सहायता नहीं मिली, जिसके कारण उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ा. दिल्ली एयरपोर्ट पर राज्य के प्रोटोकॉल अधिकारी अन्य राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की सहायता करते हैं, लेकिन 23 जुलाई को जब वे दिल्ली से देहरादून जा रहे थे, तो उन्हें इस प्रकार की सहायता नहीं मिली."

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रावत ने बताया कि कुछ लोगों के साथ अंतिम समय में बातचीत के कारण उन्हें एयरपोर्ट पहुंचने में देरी हो गई. इस स्थिति में उन्हें प्रोटोकॉल अधिकारी की सहायता की आवश्यकता थी, लेकिन जब उन्होंने प्रोटोकॉल अधिकारी से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि उनके पास इस संबंध में कोई आदेश नहीं है. ऐसी स्थिति में रावत ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की मदद ली, जिसके कारण वे अपनी फ्लाइट पकड़ सके.

रावत ने उठाया प्रोटोकॉल का मुद्दा

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि जब वे, 'मुझे सुरक्षा एस्कॉर्ट नहीं मिलता है. ट्रैफिक जाम में फंस जाता हूं तो एस्कॉर्ट सुविधा की याद आती है.' उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सभी नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों को विशेष एस्कॉर्ट सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जबकि उन्हें आवश्यकता पड़ने पर भी यह सुविधा नहीं मिल रही है.

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रावत ने स्पष्ट किया कि वे सुविधाभोगी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने राज्य और राज्य के प्रशासकों की संवेदनशीलता की कमी पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य और उसके प्रशासक इस प्रकार की स्थितियों में अधिक संवेदनशील और सहयोगात्मक होने चाहिए. त्रिवेंद्र रावत और अनिल बलूनी के सुरक्षा के बवाल के बाद अब यह पोस्ट राज्य के राजनीतिक माहौल में चर्चा का विषय बन गई है.

क्या था त्रिवेंद्र रावत और बलूनी की सुरक्षा का मामला?

अभी हाल ही में अपनी सुरक्षा को लेकर हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के द्वारा मई 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और गृहमंत्री अमित शाह लिखे गए पत्र की चर्चा होने लगीं. इस पत्राचार में रावत ने अनुरोध किया था कि उनकी सुरक्षा दोबारा Y+ श्रेणी की जाए, और इसी पत्र की अब दोबारा चर्चा हो रही है. उसी तरह चर्चा इस बात की भी है की अनिल बलूनी की सुरक्षा 2018 में Y मय एस्कॉर्ट की थी, 2022 में यह एस्कॉर्ट हटा लिया गया.

इसके जवाब उत्तराखण्ड पुलिस ने खंडन जारी किया की किसी महानुभाव की सुरक्षा में कटौती नहीं की गई है. यह एक दुष्प्रचार का प्रयास है. उत्तराखंड के ग्रह सचिव दिलीप जावलकर का भी एक पत्र सामने आया है जिसमे लिखा है किसी की भी सुरक्षा हटाई जाती है उसे सूचित किया जाता है.

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आइए जानते हैं किसे मिली है कौन सी सुरक्षा?

  • उत्तराखण्ड के राज्यपाल, मुख्यमंन्त्री, मुख्य न्यायाधीश Z+ सुरक्षा घेरे में रहते हैं.
  • वहीं 2023 की एक अधिसूचना के अनुसार, खानपुर विधायक उमेश कुमार को Y+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है, जिसमें एस्कॉर्ट की सुविधा निजी व्यय पर है.
  • इसके अलावा उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री, हाई कोर्ट के न्यायधीश, महाधिवक्ता, विधानसभा अध्यक्ष, तत्कालीन सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर आचार्य अवधेशानंद गिरी, और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को Y श्रेणी मय एस्कॉर्ट सुरक्षा दी गई है.
  • वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोशियारी (कहा जाता इन्हें भी एस्कॉर्ट मिला है) बीसी खंडूरी, विजय बहुगुणा, त्रिवेंद्र रावत हरीश रावत, तीरथ सिंह रावत को Y सुरक्षा बिना एस्कॉर्ट के मिली है.
  • वहीं हंस फाउंडेशन के भोले जी महाराज, माता मंगला, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी, सांसद अजय भट्ट, और कुछ अखाड़ों के पीठाधीश्वर को Y श्रेणी की सुरक्षा मिली है. जिसमे एस्कॉर्ट उपलब्ध नहीं है.
  • साथ ही उत्तराखण्ड सरकार के मुख्यसचिव और पुलिस महानिशेशक को भी Y सुरक्षा मिली है.

त्रिवेंद्र सिंह रावत और अनिल बलूनी की सुरक्षा का मामला, विवाद के बीच उत्तराखंड पुलिस ने दिया जवाब
 

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