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मौनी अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, कड़ाके की ठंड में गंगा में लगाई आस्था की डुबकी!

मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के मौके पर गंगा स्नान के लिए हरिद्वार (Haridwar) में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. कड़ाके की ठंड के बावजूद हर की पैड़ी पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए भक्तजन देर रात से ही पहुंचने लगे. मौनी अमावस्या पर बड़ी संख्या में लोगों ने गंगा स्नान कर सुख समृद्धि की कामना की. आज यूपी के प्रयागराज संगम में स्नान का महत्व बताया गया है.

गंगा स्नान करने के लिए उमड़े श्रद्धालु. (Photo: Aajtak) गंगा स्नान करने के लिए उमड़े श्रद्धालु. (Photo: Aajtak)
मुदित अग्रवाल
  • हरिद्वार,
  • 29 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 8:38 AM IST

हरिद्वार में मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. कड़ाके की ठंड के बावजूद हजारों श्रद्धालु हर की पैड़ी पर आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित कर रहे हैं. मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर गंगा स्नान करने से मोक्ष प्राप्त होता है और सभी पापों का नाश होता है. श्रद्धालुओं का कहना है कि वे इस अवसर का लाभ उठाने के लिए रात से ही हरिद्वार पहुंच गए थे. हरिद्वार में देशभर से श्रद्धालु पहुंचे हैं, जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं.

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गंगा स्नान के लिए देर रात से ही श्रद्धालुओं का हरिद्वार पहुंचना शुरू हो गया था. ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर मौन रहकर मां गंगा में स्नान करने और दान करने से कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं. पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है. मौनी अमावस्या पर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं.

पंडित मनोज त्रिपाठी का कहना है कि माघ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं. विशेष बात यह है कि प्रयागराज में कुंभ के दौरान पड़ने वाली इस अमावस्या में विशेष योग बन रहा है. ऐसा बताया गया है कि इस योग में स्नान करके जप-तप दान आदि करें तो वह अक्षुण्ण हो जाता है, अक्षय हो जाता है. मौनी अमावस्या में मौन रहकर स्नान करें. जो विधान बताया गया है, उसमें स्नान का महत्व है. हरिद्वार हर की पैड़ी ब्रह्मकुंड को विशेष बताया गया है.

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उन्होंने कहा कि मौन रहकर स्नान करें और इसके बाद तिल मिश्रित मिठाई, कंबल, ऊनी वस्त्र, चावल आदि दान करें. अपने पितरों के निमित तर्पण पिंडदान करें तो वह अपने पितरों को मोक्ष दे देता है. पितृ दोष से मुक्त हो जाता है. उसके पितृ उसको सात पीढ़ियों तक पुत्र पौत्र आदि को आशीर्वाद देकर भगवान नारायण में समाहित हो जाते हैं. आज स्नान करने के बाद दान का महत्व है.महाकुम्भ में स्नान के समान पुण्य मिलता है.

माघ मास की मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान को लेकर भारी भीड़ उमड़ रही है. हर की पैड़ी पर लोग आस्था और श्रद्धा के साथ गंगा स्नान कर रहे हैं. मान्यता है कि इस दिन गंगा से सुख सृमृद्धि मिलती है, पितृों की आत्मा तृप्त होती है और कुंभ में स्नान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है.

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