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हल्द्वानी: बसपा से लड़ा चुनाव, मलिक बगीचा में किया अतिक्रमण, कौन है हिंसा का मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक?

नोटिस में घटना के दिन (8 फरवरी) दर्ज की गई एफआईआर का भी जिक्र है जिसमें मलिक का नाम शामिल है. नगर निकाय ने कुल नुकसान हुई संपत्ति का प्रारंभिक आकलन 2.44 करोड़ रुपये का किया है, और मलिक को इसे चुकाने के लिए 15 फरवरी तक का समय दिया गया है.

हल्द्वानी हिंसा (फाइल फोटो) हल्द्वानी हिंसा (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • हल्द्वानी ,
  • 13 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

हल्द्वानी नगर निगम ने 8 फरवरी को शहर में हुई हिंसा के मामले में बड़ा कदम उठाते हुए बलभूनपुरा हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक के खिलाफ सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के आरोप में वसूली का नोटिस थमा दिया है. यह वसूली नोटिस कुल 2.44 करोड़ रुपये का है, जिसमें मलिक के समर्थकों पर 'मलिक का बगीचा' में अतिक्रमण हटाने गई टीम पर हमला करने और नगर निगम की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है.  

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रिपोर्ट के अनुसार बगीचा पहले खाली जमीन हुआ करती थी. यहां कुछ पेड़ थे. जिस पर बाद में साजिशन अतिक्रमण कराया गया है घर बसाये गए.

नगर निगम के इस नोटिस में इस पूरी घटना के दिन (8 फरवरी) दर्ज की गई एफआईआर का भी जिक्र है जिसमें मलिक का नाम शामिल है. नगर निकाय ने कुल नुकसान हुई संपत्ति का प्रारंभिक आकलन 2.44 करोड़ रुपये का किया है, और मलिक को इसे चुकाने के लिए 15 फरवरी तक का समय दिया गया है. मलिक को यह राशि हल्द्वानी नगर निगम में जमा करने के लिए कहा गया है. नोटिस के अनुसार अगर वह ऐसा तय समय में नहीं करता है तो उससे यह राशि कानूनी तरीके से वसूली की जाएगी. 

बसपा से लोकसभा चुनाव लड़ चुका है अब्दुल मलिक

बलभूनपुरा हिंसा के मुख्य आरोपी एवं साजिशकर्ता ने अकूत संपत्ति इक्कठा किया हुआ है. मोटा पैसा जमा करने के बाद मलिक ने नेता बनने का सपना देखा था. वह साल 2004 में फरीदाबाद से लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए बसपा से टिकट लाकर चुनाव भी लड़ चुका है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मलिक  को नामांकन के अंतिम दिन टिकट मिला था और नॉमिनेशन फाइल करने के दौरान उसके साथ 100 लोगों की टीम थी. इस चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था. उस साल इस सीट से कांग्रेस को जीत मिली थी. तब फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में मेवात भी शामिल था.

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शहर में भड़क गया था दंगा 

मलिक पर एक "अवैध संरचना" का निर्माण कराने का आरोप है, जिसे हटाने के दौरान शहर में हिंसा भड़क गई थी. इस हिंसा में छह लोगों को मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे जिसमें कई पुलिसकर्मी और मीडिया के लोग भी थे. हिंसा के दिन (8 फरवरी) शहर में दंगा भड़क गया था जिसके बाद पुलिस बल और नगर निगम के कर्मचारियों पर हमला और एक पुलिस स्टेशन में आग लगाने की घटना को अंजाम दिया गया था. मदरसा और पास मौजूद एक निकटवर्ती संरचना, जिसका इस्तेमाल प्रार्थना के लिए होता था, को हटाने के क्रम में हुई हिंसा के दौरान पांच कथित दंगाइयों सहित छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 60 लोग घायल हो गए थे. 

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