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उत्तराखंड: चमोली में तबाही का खौफनाक मंजर, देवदूत बनकर रेस्क्यू कर रहे SDRF के जवान

उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने सोमवार को कहा कि चमोली में आई आपदा में अब तक कुल 153 लोगों के लापता होने की सूचना है जिनमें से 15 के शव बरामद हो चुके हैं.

चमोली में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही (फोटो- आजतक) चमोली में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही (फोटो- आजतक)
अरविंद ओझा
  • चमोली,
  • 08 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST
  • तपोवन इलाके में सबसे अधिक बर्बादी
  • रेस्क्यू ऑपरेशन में SDRF ने दिखाई जांबाजी

उतराखंड में सबसे ज्यादा बर्बादी और तबाही तपोवन इलाके में हुई है. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जो जवान कर रहे हैं, वो बहुत जोखिम भरा है. इस इलाके में ग्लेशियर से दलदल बन गया है. ऐसे में उत्तराखंड डिजास्टर रिस्पॉन्स टीम के जाबांजों ने कड़ी मशक्कत के बाद एक एक कर रस्सियों के सहारे लोगों को बाहर निकाला. हालांकि रेस्क्यू इतना आसान भी नहीं है. क्योंकि रेस्क्यू के दौरान बस एक पैर फिसला और ऑपरेशन टीम खाई में गिर सकती है. 

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दलदली खाई से रस्सियों के सहारे लाशें भी निकाली गई हैं. तबाही की खबरों के बाद रेस्क्यू के लिए बाकी टीमों से पहले एसडीआरएफ के लोकल जवान मौके पर पहुंचे. अधिकारियों के मुताबिक टनल और तपोवन के इलाकों में दलदल होने की वजह से रेस्क्यू में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बावजूद इसके उत्तराखंड के ये देवदूत अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों की जान बचाने में जुटे हुए हैं. 

उत्तराखंड के आपदाग्रस्त चमोली जिले में सोमवार को बचाव और राहत अभियान में तेजी आने के साथ ही कुल लापता 153 लोगों में से 15 के शव बरामद हो चुके हैं. ऋषिगंगा घाटी में हिमखंड टूटने से रविवार को अचानक आई भीषण बाढ़ से प्रभावित 13.2 मेगावाट ऋषिगंगा और 480 मेगावाट तपोवन विष्णुगाड पनबिजली परियोजनाओं में लापता हुए लोगों की तलाश के लिए सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के जवान जुटे हुए हैं. 

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उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने सोमवार को कहा कि चमोली में आई आपदा में अब तक कुल 153 लोगों के लापता होने की सूचना है जिनमें से 15 के शव बरामद हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि ऋषिगंगा परियोजना स्थल पर 32 लोगों के तथा तपोवन विष्णुगाड परियोजना स्थल पर 121 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है. 

कुमार ने बताया कि बचाव और राहत अभियान पुरजोर तरीके से जारी है जिसमें बुलडोजर, जेसीबी आदि भारी मशीनों के अलावा रस्सियों और खोजी कुत्तों का भी उपयोग किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि तपोवन क्षेत्र में स्थित बड़ी सुरंग में बचाव और राहत अभियान चलाने में मुश्किल आ रही है क्योंकि सुरंग सीधी न होकर घुमावदार है. 

उत्तराखंड में ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने की घटना के बाद सोमवार को वैज्ञानिकों का एक दल देहरादून से जोशीमठ क्षेत्र के लिए रवाना हुआ. डीआरडीओ के 'बर्फ और हिमस्खलन अध्ययन प्रतिष्ठान (एसएएसई)' के वैज्ञानिक रविवार रात को हवाई मार्ग से उत्तराखंड की राजधानी पहुंचे थे. 

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा, 'डीआरडीओ-एसएएसई के वैज्ञानिकों का एक दल बीती रात देहरादून के लिए विमान से रवाना हुआ था. अब यह दल निरीक्षण करने और प्राथमिक जानकारी एकत्रित करने के लिए जोशीमठ इलाके के लिए निकल रहा है.'

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रविवार को उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी ग्लेशियर का एक भाग टूट गया था जिससे अलकनंदा नदी में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई थी. इस घटना में पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान हुआ और कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई तथा 153 लापता हैं.


 

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