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'कानून को जल्द वापस लें, नहीं तो...', UCC लागू होने के बाद उत्तराखंड के मुस्लिम संगठन की चेतावनी

उत्तराखंड में सोमवार को भारी संख्या में मुस्लिम सेवा संगठन के लोग एकजुट हुए और नारेबाजी करने लगे. उनका कहना है कि सरकार ने उन पर कानून को थोपने का काम किया है, जिसका वो विरोध करते हैं. उन्होंने विरोध में उतरकर सड़क जाम करने की चेतावनी दी है.

UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड
सागर शर्मा
  • देहरादून,
  • 27 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 10:30 PM IST

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया गया है. राज्य में लंबे समय से समान नागरिक सहिंता को लागू करने की तैयारी की जा रही थी. सरकार इस कानून को ऐतिहासिक और सभी धार्मिक समुदायों के हित में बता रही है. उधर मुस्लिम सेवा संगठन ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध किया है.

उत्तराखंड में सोमवार को भारी संख्या में मुस्लिम सेवा संगठन के लोग एकजुट हुए और नारेबाजी करने लगे. उनका कहना है कि सरकार ने उन पर कानून को थोपने का काम किया है, जिसका वो विरोध करते हैं. उन्होंने विरोध में उतरकर सड़क जाम करने की चेतावनी दी है.

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कानून वापस लेने की मांग

यूनिफॉर्म सिविल कोड को उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया है. मुस्लिम जानकारों के मुताबिक शरिया कानून 1400 साल पुराना है. यह कानून कुरान और पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं पर आधारित है. उन्होंने शरीयत कानूनों को अपनी आस्था का विषय बताया. 

उन्होंने कहा कि उनको मिली आजादी उनसे छीनने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने मांग की है कि इस कानून को जल्द वापस लिया जाए, नहीं तो समुदाय विशेष के लोग इकट्ठा होकर उत्तराखंड की सड़कें जाम करेंगे.

गोवा में पहले से लागू है UCC

भारतीय संविधान में गोवा को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है. साथ ही संसद ने कानून बनाकर गोवा को पुर्तगाली सिविल कोड लागू करने का अधिकार दिया था. इसलिए गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां यूसीसी लागू है. अब उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां आजादी के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हुआ है.

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क्या होता है यूनिफॉर्म सिविल कोड?

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का मतलब है कि देश में रहने वाले सभी नागरिकों (हर धर्म, जाति, लिंग के लोग) के लिए एक ही कानून होना. अगर किसी राज्य में सिविल कोड लागू होता है तो विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे के साथ-साथ लिव-इन रिलेशनशिप जैसे तमाम विषयों में हर नागरिकों के लिए एक से कानून होगा. शादी के साथ-साथ लिव-इन में रहने वाले कपल्स को भी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा.

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