Advertisement

मैरिज रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर पेनल्टी, शादी के एक साल तक नहीं ले सकते तलाक... उत्तराखंड के UCC बिल में क्या है?

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को लेकर बिल विधानसभा में पेश हो चुका है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज खुद सदन में बिल लेकर आए. इस बिल में शादी और तलाक से जुड़े हुए अहम बिंदु शामिल हैं.

उत्तराखंड के UCC बिल में क्या-क्या है? उत्तराखंड के UCC बिल में क्या-क्या है?
कनु सारदा/अंकित शर्मा
  • देहरादून,
  • 06 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 5:10 PM IST

उत्तराखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता को लेकर बिल पेश कर दिया है. अब इसको लेकर विधानसभा में चर्चा होगी, जिसके बाद बिल पर वोटिंग होगी. इस बिल के ड्राफ्ट में विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, न्यायिक प्रक्रिया से तलाक समेत मुद्दों को शामिल किया है.  

1- विवाह के समय पुरुष की आयु 21 वर्ष पूरी हो और स्त्री की आयु 18 साल हो. विवाह का पंजीकरण धारा 6 के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा. ऐसा नहीं करने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगेगा.

Advertisement

2- तलाक के लिए कोई भी पुरुष या महिला कोर्ट में तबतक नहीं जा सकेगा, जबतक विवाह की अवधि एक साल न हो गई हो.  

UCC पर उत्तराखंड में प्रयोग, देशभर में बनेगा माहौल... कितना काम आएगा बीजेपी का ये दांव? समझिए रणनीति

3- विवाह चाहे किसी भी धार्मिक प्रथा के जरिए किया गया हो, लेकिन तलाक केवल न्यायिक प्रक्रिया के तहत हो सकेगा.  

4- किसी भी व्यक्ति को पुनर्विवाह करने का अधिकार तभी मिलेगा, जब कोर्ट ने तलाक पर निर्णय दे दिया हो और उस आदेश के खिलाफ अपील का कोई अधिकार नहीं रह गया हो.  

5- कानून के खिलाफ विवाह करने पर छह महीने की जेल और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा नियमों के खिलाफ तलाक लेने में तीन साल तक का कारावास का प्रावधान है.  

Advertisement

6- पुरुष और महिला के बीच दूसरा विवाह तभी किया जा सकता है, जब दोनों के पार्टनर में से कोई भी जीवित न हो.  

7- महिला या पुरुष में से अगर किसी ने शादी में रहते हुए किसी अन्य से शारीरिक संबंध बनाए हों तो इसको तलाक के लिए आधार बनाया जा सकता है.  

8- अगर किसी ने नपुंसकता या जानबूझकर बदला लेने के लिए विवाह किया है तो ऐसे में तलाक के लिए कोई भी कोर्ट जा सकता है.  

9- अगर पुरुष ने किसी महिला के साथ रेप किया हो, या विवाह में रहते हुए महिला किसी अन्य से गर्भवती हुई हो तो ऐसे में तलाक के लिए कोर्ट में याचिका लगाई जा सकती है. अगर महिला या पुरुष में से कोई भी धर्मपरिवर्तन करता है तो इसे तलाक की अर्जी का आधार बनाया जा सकता है. 

10- संपत्ति को लेकर महिला और पुरुषों के बीच बराबर अधिकार होगा. इसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा. इसके अलावा इच्छा पत्र और धर्मज को लेकर भी कई तरह के नियम भी शामिल हैं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement