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Uttarkashi: 6 इंच का पाइप बना एकलौती उम्मीद, सेब, ऑरेंज, 5 दर्जन केले, दवाइयां और खाना... 41 मजदूरों के लिए क्या-क्या पहुंचाया गया

उत्तरकाशी टनल हादसे के बाद रेस्क्यू टीम को एक छोटी कामयाबी मिली है. टीम ने सफलतापूर्वक एक 6 इंच का पाइप मलबे के दूसरे तरफ पहुंचा दिया है. अब इस पाइप के जरिए ही श्रमिकों तक फल, खाना, दवाइयां और दूसरी चीजें भेजी जा रही हैं.

टनल के अंदर जब 6 इंच के पाइप से कैमरा डाला गया तो श्रमिकों ने इस तर रिएक्ट किया. (फोटो-एजेंसी) टनल के अंदर जब 6 इंच के पाइप से कैमरा डाला गया तो श्रमिकों ने इस तर रिएक्ट किया. (फोटो-एजेंसी)
पॉलोमी साहा
  • नई दिल्ली,
  • 22 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 12:49 PM IST

पुलाव से लेकर रोटी-सब्जी, फल-फ्रूट से लेकर वॉकी-टॉकी और पानी से लेकर ऑक्सीजन तक... ये सभी चीजें उत्तरकाशी की टनल में फंसे श्रमिकों तक 6 इंच के पाइप के जरिए पहुंचाई जा रही हैं. यानी अब यह 6 इंच का पाइप मजदूरों के लिए एक आखिरी उम्मीद बन गाय है. छह इंच के इस पाइप ने श्रमिकों तक चीजें पहुंचाने का रास्ता एकदम आसान कर दिया है. इस छोटी सी कामयाबी का असर यह हुआ है कि अब मजदूरों के परिवारों की उम्मीद भी बढ़ गई है कि जल्द ही उनके अपनों को टनल से बाहर निकाल लिया जाएगा. 

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दरअसल, रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी टीम ने दो दिन पहले 20 नवंबर को 6 इंच का पाइप मलबे के दूसरी तरफ पहुंचाया था. तब से मजदूरों को खाने-पीने की सभी चीजें इस पाइप के जरिए ही भेजी जा रही हैं. मंगलवार को मजदूरों को रात के खाने में पाइप के जरिए शाकाहारी पुलाव, मटर-पनीर और मक्खन के साथ चपाती भेजी गईं. बता दें कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हुए टनल हादसे को 11 दिन बीत चुके हैं. अंदर फंसे 41 श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है.

टनल में मलबे के पीछे फंसे मजदूरों को सेब, ऑरेंज, नींबू पानी के साथ-साथ 5 दर्जन केले भी भेजे गए हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी NDMA ने मंगलवार शाम बताया कि उत्तरकाशी की सिल्क्यारा टनल में कल बिछाई गई 6 इंच की पाइपलाइन पूरी तरह से काम कर रही है. छह इंच की पाइपलाइन डाले जाने के बाद ही कई चीजें भेजने में सफलता मिली है. जैसे अब दवा के साथ-साथ नमक और इलेक्ट्रॉल पाउडर के पैकेट भी श्रमिकों तक पहुंचाए जा चुके हैं.

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9वें दिन पहली बार पहुंचा था खाना

मजदूरों के टनल में फंसने के बाद पहली बर 20 नवंबर को अंदर खाना पहुंचाया जा सका था. सोमवार की रात 24 बोतल भरकर खिचड़ी और दाल भेजी गई थी. 9 दिन बाद पहली बार मजदूरों को भरपेट भोजन मिला था. इसके अलावा संतरे, सेब और नींबू का जूस भी भेजा गया था. इसके अलावा मल्टी बिटामिन, मुरमुरा और सूखे मेवे भी भेजे गए थे. दरअसल, टनल में 8 राज्यों के 41 मजदूर फंसे हैं.

 

वॉकी टॉकी के जरिए हो चुकी है बात

मजदूरों और सुरंग के अंदर का हाल चाल जानने के लिए पाइप के जरिए सुरंग में कैमरा भेजा गया था. इसमें सुरंग के अंदर के हालात कैद हुए थे. अधिकारियों ने वॉकी टॉकी के जरिए मजदूरों से बात की थी. सुरंग के अंदर का जो फुटेज सामने आया था, उसमें देखा गया है कि वे 10 दिन से कैसे सुरंग में रहने को मजबूर हैं. सुरंग से मजदूरों के रेस्क्यू में जुड़े कर्नल दीपक पाटिल ने बताया था कि सुरंग के अंदर फंसे लोगों को खाना, मोबाइल और चार्जर भेजने की कोशिश की जा रही है. अंदर वाईफाई कनेक्शन लगाने की भी कोशिश की जाएगी.

पाइप पहुंचने के बाद बढ़ी उम्मीद

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रेस्क्यू टीम के टनल में 6 इंच का पाइप डालने के बाद श्रमिकों के परिवारों ने भी कुछ राहत की सांस ली है. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही उनके परिवार के सदस्यों को टनल से निकाल लिया जाएगा. उत्तरकाशी की सिल्कयारा टनल में पिछले 11 दिनों से फंसे विश्वजीत और सुबोध के भाई इंद्रजीत अब भी वहां मौजूद हैं. टनल में फंसे मजदूरों के परिवारों में से इंद्रजीत सबसे पहले हादसे वाली जगह पर पहुंचे थे. इंद्रजीत के साथ ही झारखंड के संयुक्त श्रम आयुक्त प्रदीप लाखरा भी उत्तरकाशी पहुंचे थे.

4.5 किलोमीटर लंबी है सुरंग

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिलक्यारा सुरंग केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी चारधाम ‘ऑल वेदर सड़क' (हर मौसम में आवाजाही के लिए खुली रहने वाली सड़क) परियोजना का हिस्सा है. ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रही यह सुरंग 4.5 किलोमीटर लंबी है. 12 नवंबर को सुरंग का एक हिस्सा ढह गया. इससे मजदूर सुरंग के अंदर ही फंस गए. इन्हें निकलने के लिए 11 दिन से रेस्क्यू अभियान जारी है. लेकिन अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिली है.

कहां फंसे हैं मजदूर?

> सिलक्यारा छोर से मजदूर अंदर गए थे. 2340 मीटर की सुरंग बन चुकी है. इसी हिस्से में 200 मीटर की दूरी पर मलबा गिरा है. मलबा करीब 60 मीटर लंबाई में है. यानी मजदूर 260 मीटर के ऊपर फंसे हैं. लेकिन मजदूरों के पास मूव करने के लिए दो किलोमीटर का इलाका है. 50 फीट चौड़ी रोड और दो किलोमीटर लंबाई में वो मूव कर सकते हैं.

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> इसी 60 मीटर मलबे में से 24 मीटर से ज्यादा ड्रिलिंग हो चुकी है. यानी करीब 36 मीटर हिस्सा भेदना है, जहां दिक्कत आ रही है, क्योंकि कुछ चट्टानें भी गिरी हैं.

> बड़कोट के दूसरे छोर पर 1740 फीट सुरंग बन चुकी है. अब यहां से ड्रिलिंग शुरू हुई है. लेकिन यहां से 480 मीटर तक ड्रिलिंग करनी होगी, तब जाकर मजदूरों तक पहुंच पाएंगे.

> तीसरा सिरा ऊपर से पहाड़ को ड्रिल करके मजदूरों तक पहुंचना है. इसके दो प्वाइंट हैं. एक प्वाइंट पर ड्रिल करेंगे तो 86 मीटर खोदकर सुरंग तक पहुंच जाएंगे. दूसरा प्वॉइंट ऊंचाई पर है. यहां से ड्रिल करेंगे तो 325 मीटर ड्रिल करके ही सुरंग तक जा पाएंगे.

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