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उत्तराखंड: नाबालिग पार्टनर, झूठ या धोखे का सहारा, लिव-इन में फर्जीवाड़े पर जेल पक्का समझिए!

अगर कोई लड़का या लड़की पहले से शादीशुदा है और वो धोखे से फिर से लिव इन में जा रहा है तो ऐसी सूचना मिलते ही रजिस्ट्रार स्थानीय थाने को इसकी जानकारी देगा. इसके बाद दोषी व्यक्ति पर कानून के तहत कार्यवाही की जा सकेगी.

लिव इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के लिए कई सख्त प्रावधान (फोटो-AI जेनेरेटेड) लिव इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के लिए कई सख्त प्रावधान (फोटो-AI जेनेरेटेड)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 3:46 PM IST

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हो गई है. इस कानून में राज्य में लिव इन में रह रहे कपल की सुरक्षा के लिए सरकार ने कई प्रावधान किये हैं.अब राज्य में मकान मालिकों को किराएदारों और लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों का वेरिफिकेशन भी कराना पड़ेगा. उत्तराखंड में अगर कोई कपल लिव इन में है तो उन्हें इसका रजिस्ट्रेशन तो कराना ही पड़ेगा. इसके अलावा उन्हें किराया पर कमरा लेने से पहले मकान मालिक को लिव इन रजिस्ट्रेशन की कॉपी भी देनी पड़ेगी. 

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अगर मकान मालिक बिना लिव इन रजिस्ट्रेशन की कॉपी के कॉपी के रेंट एग्रीमेंट बनवाता है तो रजिस्ट्रार उस पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है. 

लिव इन के लिए रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन या ऑफलाइन किया जा सकता है. इसके लिए युगल को 16 पन्नों का फॉर्म भरना होगा. 

लिव इन में रहने जा रहे कपल को अपने पिछले रिलेशनशिप की जानकारी भी देनी होगी. 

रजिस्ट्रार फॉर्म में भरे गये सभी तथ्यों की जांच कर संतुष्ट होगा तभी आगे की प्रक्रिया की जा सकेगी. रजिस्ट्रार के पास पूछताछ और जांच करने के लिए 30 दिनों का समय होगा. 

अगर रजिस्ट्रार कपल को लिव इन प्रमाण देने के अयोग्य समझता है तो वह इसकी पूरी लिखित वजह दोनों को ही बताएगा. 

नए नियमों के अनुसार अगर कोई कपल 1 महीने से ज्यादा लिव इन में रहता है और वह इसकी जानकारी रजिस्ट्रार को नहीं देता है तो मजिस्ट्रेट द्वारा उसे तीन महीने तक की सजा दी जा सकती है, या फिर 10 हजार का जुर्माना हो सकता है या फिर दोनों ही सजा दी जा सकती है. 

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अगर रजिस्ट्रार के सामने कोई गलत सूचना देकर लिव इन रजिस्ट्रेशन हासिल करता है तो इसके लिए भी उन्हें सजा हो सकती है. 

अगर कोई महिला लिव इन में है और उसका पार्टनर उसे छोड़ देता है तो वह मुआवजा पाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है.

इन परिस्थितियों में एक लड़का और एक लड़की के बीच लिव इन रजिस्टर्ड नहीं हो सकेगा. 

1-वैसे संबंध जो कानून की नजर में वैध नहीं हैं.

2-जहां जहां एक पार्टनर पहले से शादीशुदा है अथवा पहले से किसी के साथ लिव इन में रह रहा है.

3.जहां कम से कम एक पार्टनर नाबालिग हो.

4-वैसी स्थिति जब लिव इन में जा रहे पार्टनर की सहमति जबरन, दबाव डालकर, प्रभावित कर, गलत बयानी कर अथवा धोखे से ली गई है. 

 

अगर लिव इन में रह रहे कपल को इस रिश्ते को टर्मिनेट करना हो तो इनमें से कोई एक निश्चित फॉरमेट में रजिस्ट्रार को को जानकारी देकर इसे खत्म कर सकता है. 

लिव इन को खत्म करने की जानकारी मिलते ही रजिस्ट्रार इसकी जानकारी दूसरे पार्टनर को देगा. और अगर इनमें से किसी भी पार्टनर की उम्र 21 साल से कम है तो वह इसकी जानकारी उनके माता-पिता को भी देगा. 

अगर लिव इन में रहने जा रहे लोगों की उम्र 21 साल से कम है तो रजिस्ट्रार इसकी जानकारी उनके माता-पिता और गार्जियन को देगा. 

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अगर रजिस्ट्रार को लगता है लिव इन रजिस्ट्रेशन के लिए दी गई जानकारी गलत है तो वह उचित कार्रवाई के लिए उनके स्थानीय थाने को सूचित करेगा. 

बता दें कि लिव इन जोड़ों के लिए पंजीकरण शुल्क ₹500 है जबकि एक महीना देरी होने पर ₹1000 शुल्क लिया जाएगा. लिव इन रिलेशनशिप में रहने के 1 महीने के भीतर यह पंजीकरण अनिवार्य होगा. 

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