Advertisement

नवनीत राणा को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने जाति प्रमाण को ठहराया सही, पलटा बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला

अमरावती से सांसद नवनीत कौर राणा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. SC ने उनका जाति प्रमाण पत्र सही ठहराया है और बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है. नवनीत राणा अमरावती लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार हैं. नवनीत पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए 'मोची' जाति का प्रमाण पत्र हासिल किया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले को खारिज कर दिया.

अमरावती से बीजेपी उम्मीदवार नवनीत राणा.  (Photo: PTI) अमरावती से बीजेपी उम्मीदवार नवनीत राणा. (Photo: PTI)
कनु सारदा
  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

आम चुनाव में महाराष्ट्र के अमरावती से बीजेपी उम्मीदवार नवनीत कौर राणा को जाति प्रमाण पत्र मामले पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. SC ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया है और नवनीत के जाति प्रमाण पत्र को सही ठहराया है.

नवनीत कौर राणा ने अपना जाति प्रमाणपत्र रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने सुनवाई की और नवनीत के पक्ष में फैसला सुनाया. नवनीत राणा 2019 का चुनाव अमरावती सीट से निर्दलीय लड़ी थीं और जीत हासिल की थी. हाल ही वे बीजेपी में शामिल हुई हैं और इस बार आम चुनाव में फिर उम्मीदवार हैं. अमरावती सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है.

Advertisement

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 लाख रुपए का लगाया था जुर्माना

बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 जून 2021 को कहा था कि नवनीत ने मोची जाति का प्रमाण पत्र फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी से हासिल किया था. हाईकोर्ट ने उन पर 2 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया था. HC ने आदेश में कहा था कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि वो 'सिख-चमार' जाति से थीं.

'स्क्रूटनी कमेटी से नवनीत को मिली थी क्लीन चिट'

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि नवनीत राणा के जाति प्रमाणपत्र में कोई खामी नहीं है. स्क्रूटनी कमेटी यानी जांच समिति का फैसला सही था, इसमें हाईकोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए था. स्क्रूटनी कमेटी ने नवनीत राणा के जाति प्रमाणपत्र को सही माना था और क्लीन चिट दे दी थी. शिवसेना नेता आनंदराव अडसुल ने मुंबई जिला जाति प्रमाण पत्र जांच समिति के पास शिकायत दर्ज की थी. हाईकोर्ट ने कहा था कि जांच समिति द्वारा पारित आदेश पूरी तरह से विकृत, बिना सोचे-समझे और रिकॉर्ड पर सबूतों के विपरीत था. यह भी कहा कि नवनीत राणा के मूल जन्म प्रमाण पत्र में जाति 'मोची' का उल्लेख नहीं था.

Advertisement

'सच्चाई की हमेशा जीत होती है'

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नवनीत राणा ने खुशी जताई और कहा, जिन्होंने मेरे जन्म पर सवाल उठाए थे, उन्हें आज जवाब मिल गया है. मैं सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देती हूं. सच्चाई की हमेशा जीत होती है. यह बाबा साहेब अंबेडकर और छत्रपति शिवाजी महाराज के दिखाए रास्ते पर चलने वालों की जीत है.

मॉडलिंग, फिल्में, रियल्टी शो, राजनीति... जानिए नवनीत राणा को

नवनीत राणा ने सिल्वर स्क्रीन पर अपना करियर बतौर मॉडल के रूप में शुरू किया था. शुरुआती दिनों में उन्होंने 6 म्यूजिक एल्बम में काम किया. 2003 में उन्होंने दर्शन नाम की कन्नड़ फिल्म साइन की. भले ही ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर पाई, लेकिन इसने नवनीत को एक पहचान दिला दी. बाद में उन्होंने तेलगु फिल्मों में एक्टिंग शुरू की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. नवनीत ने मलयालम फिल्म लव एंड सिंगापुर में काम किया. पंजाब फिल्म लड़ गए पेंच में भी काम किया. रिएल्टी शो हुम्मा-हुम्मा में भी बतौर कंस्टेंट नजर आईं.  

बाबा रामदेव के आश्रम में हुई रवि राणा से मुलाकात

नवनीत को योग का शौक रहा है. इसी सिलसिले में बाबा रामदेव से उनके आश्रम में नवनीत की एक छोटी-सी मुलाकात हुई और जिंदगी बदल गई. उस समय नवनीत रुपहले पर्दे पर छाई हुईं थीं. उनका बाबा रामदेवी के आश्रम में आना-जाना था. वहां उनकी मुलाकात महाराष्ट्र से निर्दलीय विधायक रवि राणा से हुई. इस मुलाकात के बाद नवनीत कौर ने रवि राणा से शादी करने का फैसला किया. बड़ी बात ये है कि दोनों ने 2 फरवरी 2011 को सामूहिक विवाह समारोह में सात फेरे लिए थे. शादी के बाद नवनीत ने सिल्वर की दुनिया को अलविदा कह दिया और समाजसेवा के काम में जुट गईं. चुनाव में पति रवि राणा की मदद करने लगीं और प्रचार अभियान में कमान संभालने लगीं.

Advertisement

2014 में पहली बार चुनाव लड़ीं नवनीत राणा

इस बीच, नवनीत ने भी सियासत में एंट्री ली. नवनीत राणा ने साल 2014 में अमरावती सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया. उन्होंने ये चुनाव एनसीपी के सिंबल पर लड़ा था. हालांकि, वे हार गईं और दूसरे नंबर पर आईं. नवनीत की राजनीति में सक्रियता बनी रही और 5 साल बाद 2019 में वो निर्दलीय मैदान में उतरीं. उन्होंने शिवसेना उम्मीदवार को हराया था. वे बेहद कम उम्र में सांसद बनी थीं. नवनीत को कांग्रेस और एनसीपी का समर्थन हासिल था. इस जीत के बाद नवनीत राणा और एनसीपी के रिश्ते जुदा हो गए हैं. सियासी दोस्त, सियासी दुश्मन बन गए. नवनीत की पूरे 5 साल शिवसेना से तल्खी किसी से छिपी नहीं रही. उनका बीजेपी के प्रति हमेशा से सॉफ्ट नेचर देखने को मिला था. हाल ही में उन्होंने बीजेपी जॉइन कर ली और अमरावती से महायुति की उम्मीदवार घोषित की गई हैं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement