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बिलकिस बानो मामले में कल सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई होने वाली है. बिलकिस ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की है जिसमें एक दोषी की याचिका पर फैसला दिया था कि दोषियों की रिहाई पर गुजरात सरकार 1992 की नीति से विचार करे.

बिलकिस बानो मामले में अहम सुनवाई बिलकिस बानो मामले में अहम सुनवाई
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 12 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 12:07 AM IST

बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को अहम सुनवाई करने वाला है. बिलकिस की तरफ से कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच चेंबर मे उस याचिका पर सुनवाई करने जा रही है. बिलकिस ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की है जिसमें एक दोषी की याचिका पर फैसला दिया था कि दोषियों की रिहाई पर गुजरात सरकार 1992 की नीति से विचार करे.

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किस बारे में है बिलकिस की याचिका?

असल में मई 2022 में जस्टिस अजय रस्तोगी ने एक दोषी की याचिका पर आदेश दिया था कि गुजरात सरकार 1992 की रिहाई की नीति के तहत बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई पर विचार कर सकती है. हालांकि बिलकिस बानो ने अपनी याचिका में कहा है कि इस मामले का पूरा ट्रायल महाराष्ट्र में चला है और वहां की रिहाई नीति के तहत ऐसे घृणित अपराधों में 28 सालों से पहले रिहाई नही हो सकती है.

अब कोर्ट बिलकिस की याचिका को सही मानता है या नहीं, ये मंगलवार को स्पष्ट हो जाएगा. जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि जिस राज्य में अपराध होगा, उसी राज्य में दोषी की आवेदन पर विचार किया जा सकता है. अब क्योंकि बिलकिस बानो वाला मामला गुजरात का था, लिहाजा इस मामले में दोषियों को अपनी सजा कम करवानी थी, तो गुजरात सरकार से अपील करनी थी. सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद ही रीमिशन पॉलिसी को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो वाले मामले में सभी दोषियों के लिए रिहाई का फैसला सुना दिया. 

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रीमिशन पॉलिसी क्या होती है?

रीमिशन पॉलिसी का सरल भाषा में मतलब सिर्फ इतना रहता है कि किसी दोषी की सजा की अवधि को कम कर दिया जाए. बस ध्यान इस बात का रखना होता है कि सजा का नेचर नहीं बदलना है, सिर्फ अवधि कम की जा सकती है. वहीं अगर दोषी रीमिशन पॉलिसी के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करता है, तो ये जो छूट उसे दी जा सकती है, वो उससे वंचित रह जाता है और फिर उसे पूरी सजा ही काटनी पड़ती है.

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