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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को साइरस मिस्त्री मौत मामले में स्त्री रोग विशेषज्ञ अनाहिता पंडोले को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने पंडोले के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का आरोप शामिल करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट का कहना था कि जनहित याचिका एक 'प्रचार हित याचिका' प्रतीत होती है. इसका याचिकाकर्ता से दूर-दूर तक संबंध नहीं है.
बता दें कि पिछले साल एक कार हादसे में टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री का निधन हो गया था. उस वक्त कार को स्त्री रोग विशेषज्ञ अनाहिता पंडोले ड्राइव कर रही थीं. पंडोले के साथ उनके पति और एक अन्य रिश्तेदार भी कार में बैठे थे. मंगलवार को इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में खुद को एक्टिविस्ट बताने वाले संदेश जेधे की याचिका पर सुनवाई हुई. कार्यवाहक चीफ जस्टिस एसवी गंगापुरवाला और जस्टिस संदीप मार्ने की बेंच ने याचिकाकर्ता संदेश जेधे पर जुर्माना भी लगाया.
'ये 'प्रचार हित याचिका' लग रही है'
कोर्ट ने इस जनहित याचिका को 'प्रचार हित याचिका बताया और कहा- ये जनहित के लिए बिल्कुल प्रतीत नहीं होती है. बेंच ने कहा कि मामले में आरोप तय किए जाने हैं. अभियोजन पक्ष द्वारा चार्जशीट पहले ही दायर की जा चुकी है. हमें जनहित याचिका में कोई जनहित शामिल नहीं दिख रहा है. ये 'प्रचार हित याचिका' लग रही है. हम वर्तमान जनहित याचिका को बिना किसी सार या गुण या कारण के पाते हैं. हम कॉस्ट के साथ खारिज करते हैं. अदालत ने अभी तक जुर्माने की राशि का जिक्र नहीं किया है. बाद में इसे विस्तृत आदेश में शामिल किया जाएगा.
'इन धाराओं में केस दर्ज करने की मांग उठाई थी'
शहर के याचिकाकर्ता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका में अनहिता पंडोले के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304ए (लापरवाही से मौत का कारण) के बजाय धारा 304 II (गैर इरादतन हत्या) को शामिल करने के लिए महाराष्ट्र पुलिस को निर्देश देने की मांग की थी. बताते चलें कि धारा 304A में अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान है, जबकि धारा 304 II में 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विकार राजगुरु और सादिक अली ने दावा किया कि अनाहिता पंडोले मर्सिडीज-बेंज कार चलाते समय शराब के नशे में थी. उन्होंने एक 'फॉरेंसिक रिपोर्ट' का उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर संकेत दिया गया था कि अनाहिता पंडोले शराब के प्रभाव में थीं. क्योंकि वह कार चलाने से पहले 4 सितंबर की देर रात तक एक कैफे में शराब का सेवन कर रही थीं.
'कोर्ट ने जानकारी का सोर्स पूछा तो बताया गोपनीय'
जब पीठ ने यह जानना चाहा कि यह जानकारी कहां से हासिल की गई तो अली ने कहा कि यह गोपनीय सोर्स से मिली है. बेंच ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने तथ्यों की पर्याप्त जानकारी के बिना यह जनहित याचिका पेश की है. जब याचिका दायर की जाती है तो दलीलें शपथ पर होती हैं, वे आकस्मिक और बेहूदा दलीलें नहीं हो सकतीं. अदालत दलीलों पर निर्भर है. यहां तक कि अभियुक्त के शराब पीकर गाड़ी चलाने के बयान भी रिकॉर्ड में मौजूद किसी भी साक्ष्य द्वारा समर्थित नहीं हैं. जब अदालत में याचिका दायर की जानी है तो उसे तथ्यों से प्रमाणित करना होगा. विशेष रूप से जनहित याचिकाओं में. हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मामले में तथ्यों से अनभिज्ञ है और केस से दूर-दूर तक भी नहीं जुड़ा था.
साइरस मिस्त्री (54) और उनके दोस्त जहांगीर पंडोले की 4 सितंबर को मौत हो गई थी. उनकी लग्जरी कार मुंबई-अहमदाबाद राजमार्ग से सटे पालघर जिले में सूर्या नदी पर एक पुल पर एक डिवाइडर से टकरा गई थी. तब कार को अनाहिता पंडोले (55) चला रही थीं. उनके साथ पति डेरियस पांडोले गंभीर रूप से घायल हो गए थे. बाद में पुलिस ने अनाहिता पंडोले के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने का केस दर्ज किया था.