
मध्यप्रदेश की इंदौर हाईकोर्ट ने नाबालिग अपराधियों के लिए मौजूदा कानून को अप्रासंगिक बताते हुऐ एक आदेश में कहा है कि यह कानून 16 साल से कम उम्र के अपराधी मानसिकता के किशोरों को जघन्य अपराधों की एक तरह से छूट देता है.
झाबुआ में एक नाबालिग से नाबालिग द्वारा दुष्कर्म के मामले मे जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश मे तीखी टिप्पणी.करते हुआ लिखा कि पता नहीं देश के सांसदों की जनचेतना को झकझोरने के लिए कितनी और निर्भयाओं को अपनी बलि देनी पड़ेगी.
दरअसल, इंदौर हाईकोर्ट ने दिनांक 25 जून 2021 को नाबालिग लड़की के साथ 15 साल के किशोर द्वारा जघन्य तरीके से दुष्कर्म किये जाने के मामले मे आरोपी किशोर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया. हाईकोर्ट जज सुबोध अभयंकर ने आदेश मे कुछ.गंभीर सवाल उठाकर सांसदों पर कड़ी टिप्पणी की.
आदेश में जज ने निर्भया कांड से भी विधानमंडल द्वारा सबक ना सीखने की बात कही और कहा गया कि 16 साल से कम उम्र के अपराधी मानसिकता के किशोरों को मौजूदा कानून जघन्य अपराधों को.करने की छूट सा प्रोत्साहन देता है.
जज ने उठाए ने सांसदों की चेतना पर सवाल
जज ने सवाल किया कि देश के सांसदों की चेतना को.झकझोरने के लिए कितनी और निर्भयाओं को अपनी बलि देनी होगी? जज ने अपने नाराजगी भरे इस आदेश की प्रति भारत सरकार के कानूनी मामलों के विधि सचिव को भी भेजने को कहा है.
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने जिस मामले मे जमानत याचिका की सुनवाई के बाद यह तीखी टिप्पणियों वाला आदेश पारित किया है. वह मामला मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले से जुड़ा हुआ है. यहां जनवरी 2017 में झाबुआ कोतवाली के आंबा पीथमपुर गांव मे एक नाबालिग लड़की के साथ गांव के ही नाबालिग 15 साल के किशोर ने जघन्य तरीके से दुष्कर्म किया था जिसके बाद पीड़िता को पहले जिला अस्पताल झाबुआ और फिर इंदौर रेफर कर उसके निजी और आंतरिक अंगों की सर्जरी कर ही उसे बचाया जा सका था.
झाबुआ एसपी आशुतोष गुप्ता के अनुसार मामले मे पुलिस ने चालान पेश कर.दियाf है और सूचना है कि आरोपी की जमानत याचिका हाईकोर्ट मे भी खारिज हो गयी है.
इंदौर हाईकोर्ट के इस आदेश से साफ है कि जब न्याय देने के लिऐ जिम्मेदार शीर्ष अदालतों तक को मौजूदा कानून नाकाफी लगते हैं तो फिर आम आदमी, खासकर बेटियां कैसै हैवानों से सुरक्षित हो पाएंगी.
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