
पश्चिम बंगाल में टीचर भर्ती मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी को सीबीआई की विशेष कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने गुरुवार को पार्थ चटर्जी और अन्य छह गिरफ्तार आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है और न्यायिक हिरासत दो फरवरी तक बढ़ा दी है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान पार्थ के वकील ने जॉली एलएलबी फिल्म का जिक्र किया और कहा- अगर ऐसा रहा तो फिर धरना देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.
पार्थ चटर्जी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले साल 23 जुलाई को अपनी कथित करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट से भारी मात्रा में नकदी, जेवर और संपत्ति के कागजात की बरामदगी के बाद गिरफ्तार किया था. कोर्ट के आदेश पर 16 सितंबर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्हें हिरासत में ले लिया था.
सीबीआई ने किया जमानत याचिका का विरोध
गुरुवार को अलीपुर अदालत में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के समक्ष जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई. पार्थ चटर्जी के वकीलों ने कोर्ट के समक्ष दावा किया कि उनके कब्जे से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है और जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है. सीबीआई के वकील ने जमानत अर्जी का विरोध किया और कहा कि एजेंसी उन एजेंटों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर अन्य बिंदुओं के साथ-साथ नौकरियों के घोटाले के लिए लेन-देन को लेकर सहभागिता की. सीबीआई की तरफ से कहा गया कि पूर्व मंत्री को रिहा करने से जांच में प्रभावित हो सकती है.
'कब तक सलाखों के पीछे रखा जाएगा?'
पार्थ चटर्जी की तरफ से कोर्ट में किसी भी शर्त पर तत्काल जमानत देने की मांग की गई. उनके वकील सलीम अहमद ने कोर्ट रूम में बॉलीवुड फिल्म जॉली एलएलबी के संदर्भ का जिक्र किया. अधिवक्ता सलीम अहमद ने अदालत से कहा- 'न तो मेरे मुवक्किल ने एक रुपया लिया और न उनके आवास से कोई रुपया बरामद किया गया है. उनका मनी ट्रायल से भी कोई सीधा संबंध नहीं है जो सीबीआई कह रही है. ऐसे में वो कब तक सलाखों के पीछे समय बिताएंगे?'
'तब धरना के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचेगा'
अहमद ने आगे कहा- 'सीबीआई केस डेयरी में गुप्त सूचनाओं का जिक्र कर रही है और उनकी जमानत खारिज करने के लिए नए घटनाक्रम का दावा कर रही है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो बॉलीवुड फिल्म जॉली एलएलबी के सीन की तरह धरने पर बैठने के अलावा कोई उपाय नहीं बचेगा. वकील ने कहा- अगर उन्हें जमानत मिल जाती है तो वह तुरंत शिक्षा मंत्रालय में शामिल होने नहीं जा रहे हैं, बल्कि वे जांच में सहयोग करेंगे.
पार्थ समेत सातों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
हालांकि, सीबीआई ने पार्थ चटर्जी की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया और कोर्ट से उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की. सीबीआई ने यह भी दावा किया कि उन्हें पहले गिरफ्तार किए गए दो बिचौलियों से पूछताछ करने की जरूरत है. सीबीआई का यह भी दावा है कि अयोग्य उम्मीदवारों को अवैध तरीके से भर्ती करने के लिए बड़े तौर पर पैसों का लेन-देन किया गया है. कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद सभी सातों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी और न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ा दी. इन सभी को 2 फरवरी को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा.
बताते चलें कि चटर्जी ने ममता बनर्जी की सरकार में 2014 और 2021 के बीच शिक्षा विभाग संभाला था. आरोप है कि इस दौरान कथित तौर पर सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितताएं हुई हैं. ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद ममता बनर्जी सरकार ने चटर्जी को मंत्री पद से हटा दिया था. गिरफ्तारी के समय चटर्जी राज्य सरकार में संसदीय मामलों, उद्योग और वाणिज्य समेत कई विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. बाद में तृणमूल कांग्रेस ने चटर्जी को पार्टी में महासचिव समेत सभी पदों से भी हटा दिया था.