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मुस्लिम पुरुषों की एक से ज्यादा शादियों का रजिस्ट्रेशन... बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज

राष्ट्रवादी शिव सेना के अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद जय भगवान गोयल ने कहा कि वो बॉम्बे हाईकोर्ट में उनके निर्णय पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे. वो हाईकोर्ट से खुद को पक्षकार बनाए जाने की भी गुहार लगाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 03 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:15 PM IST

मुस्लिम पुरुष को एक से ज्यादा शादी करने पर उनका भी रजिस्ट्रेशन कराने की इजाज़त दिए जाने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता जय भगवान गोयल से कहा कि चूंकि वो बॉम्बे हाईकोर्ट में पक्षकार नहीं थे लिहाजा उसकी याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती.

दरअसल, राष्ट्रवादी शिव सेना के अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद जय भगवान गोयल ने कहा कि वो बॉम्बे हाईकोर्ट में उनके निर्णय पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे. वो हाईकोर्ट से खुद को पक्षकार बनाए जाने की भी गुहार लगाएंगे.

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क्या था बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला?

पिछले साल बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा था कि मुस्लिम पुरुष अपनी एक से ज्यादा शादियों का रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, क्योंकि उनके व्यक्तिगत कानून उन्हें एक समय में चार शादियां करने की अनुमति देते हैं. यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया था, जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी तीसरी शादी का रजिस्ट्रेशन कराने की मांग की थी. यह शादी फरवरी 2023 में एक अल्जीरियाई महिला से हुई थी, लेकिन महाराष्ट्र के एक शादी अधिनियम के आधार पर इसे रजिस्टर करने से इनकार कर दिया गया था.

ठाणे नगर निगम ने इस शादी को रजिस्टर करने से इसलिए मना कर दिया था क्योंकि महाराष्ट्र वैवाहिक ब्यूरो और विवाह पंजीकरण अधिनियम के तहत एक ही शादी का जिक्र है, और इसमें कई शादियों की बात नहीं की गई है.

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15 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान जस्टिस बीपी कोलाबावाला और सोमशेखर सुंदरशन की बेंच ने नगर निगम के इस फैसले को पूरी तरह से गलत करार दिया और कहा कि यह अधिनियम मुस्लिम पुरुषों को एक से ज्यादा शादियों का रजिस्ट्रेशन कराने से नहीं रोकता है, क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत उन्हें एक समय में चार पत्नियां रखने की अनुमति है. 

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