Advertisement

सोशल मीडिया पर बोल्डनेस पत्नी को पड़ी भारी... तस्वीरें देखकर हाईकोर्ट ने खारिज किया गुजारा भत्ता देने का आदेश

कोर्ट ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप से लिए गए सबूतों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तस्वीरों में हेरफेर या मॉर्फ करना संभव है. लेकिन इन्हें इस तरह के अनुमान पर पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. पति द्वारा सबूत के तौर पर पेश की गई तस्वीरों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि पत्नी और दूसरे व्यक्ति के बीच संबंध हैं, खासकर तब जब पत्नी यह नहीं बता पाई कि वह किस हैसियत से दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही है.

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया (प्रतीकात्मक तस्वीर) पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मनजीत सहगल
  • चंडीगढ़,
  • 03 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 11:33 PM IST

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महिला की याचिका पर फैसला सुनाया, जिसमें उसने अलग रह रहे पति से गुजारा भत्ता और मुकदमेबाजी के खर्च की मांग की थी. यह फैसला न केवल आंखें खोलने वाला है, बल्कि दर्जनों ऐसे पीड़ितों के लिए भी मददगार हो सकता है, जिन्हें पत्नी द्वारा छोड़ दिया गया और दूसरे व्यक्ति के साथ रहने के बावजूद भरण-पोषण की मांग करते हुए अदालतों में घसीटा गया.

Advertisement

दरअसल, हाईकोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें पति को पत्नी को मासिक भरण-पोषण और एकमुश्त मुकदमेबाजी खर्च देने की बात कही गई थी. कारण, महिला अपने पति को छोड़कर दूसरे व्यक्ति के साथ रहने लगी और उसके साथ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर करने लगी.

इस पर पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर भत्ता देने के आदेश को खारिज करने की मांग की गई थी. कोर्ट ने इस याचिका को इसलिए स्वीकार कर लिया क्योंकि याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में पत्नी को दूसरे व्यक्ति के साथ दिखाया गया था. पति ने उस पर सोशल मीडिया पर बोल्ड तस्वीरें डालने का भी आरोप लगाया. 

कोर्ट ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप से लिए गए सबूतों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तस्वीरों में हेरफेर या मॉर्फ करना संभव है. लेकिन इन्हें इस तरह के अनुमान पर पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. पति द्वारा सबूत के तौर पर पेश की गई तस्वीरों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि पत्नी और दूसरे व्यक्ति के बीच संबंध हैं, खासकर तब जब पत्नी यह नहीं बता पाई कि वह किस हैसियत से दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही है.

Advertisement

न्यायमूर्ति सुमित गोयल ने कहा, 'फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक जीवन बेहद और खुले तौर पर जुड़ा हुआ है. फोटो और टेक्स्ट एक्सचेंज सहित सोशल नेटवर्क के फुटप्रिंट को साक्ष्य उद्देश्यों के लिए माना जा सकता है और अदालतें इसका न्यायिक संज्ञान ले सकती हैं."

अदालत ने यह भी देखा कि आम तौर पर प्रत्यक्ष प्रमाण प्राप्त करना मुश्किल होता है और व्यभिचार की सभी क्रियाओं को संदर्भ के भीतर अवरोही टिप्पणियों द्वारा समझा, समझा और पता लगाया जा सकता है.

पत्नी को भरण-पोषण, मुकदमेबाजी खर्च नहीं मिलेगा

अदालत ने फैसला सुनाया कि पत्नी पति से किसी भी भरण-पोषण और मुकदमेबाजी खर्च की हकदार नहीं है, जब उसने स्वीकार किया कि वह किसी अन्य पुरुष के साथ रह रही थी.

कोर्ट ने कहा कि महिला द्वारा पत्नी के आचरण का उल्लंघन करने के कारण पति पर अनावश्यक रूप से बोझ नहीं डाला जा सकता. न्यायालय ने पति और पत्नी दोनों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाने की आवश्यकता पर भी गौर किया. हाईकोर्ट ने कहा, "पुरुष होने के कारण पति को किसी भी या सभी परिस्थितियों में वित्तीय कर्तव्यों को वहन करने वाला बोझ नहीं माना जाना चाहिए."

ये है पूरा मामला

Advertisement

बता दें कि हाईकोर्ट की पीठ एक पारिवारिक न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध पति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसे अपनी पत्नी को 3000 रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण और 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च का भुगतान करने के लिए कहा गया था.
पति ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी किसी और के साथ रह रही है और व्यभिचार कर रही है, इसलिए वह इस दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत उपलब्ध भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement