
उत्तर प्रदेश में दोष साबित होने के बाद उम्र कैद की सजा काट रहे अपराधियों की सजा अवधि से पहले रिहाई यानी प्री-मेच्योर रिलीज के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. कोर्ट ने इस मामले में दिशानिर्देश जारी करते हुए सभी दोषियों की प्री-मेच्योर रिलीज का निपटारा तीन महीने में करने को कहा.
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा कि लीगल सर्विसेज अथॉरिटी हर महीने हर एक जिले की जेल के सुपरिंटेंडेट से सूचना इकट्ठी करेगीं. अथॉरिटी का काम होगा कि वो ऐसे लोगों की लिस्ट बनाएं जिन्हें कि प्री-मेच्योर रिलीज का लाभ दिया जा सकता है.
साल में 3 बार होगी बैठक
CJI की पीठ ने कहा, प्री-मेच्योर रिलीज के केस में यह भी ध्यान रखा जाएगा कि कौन से मामले में यह छूट राज्य की ओर से दी जा रही है, साथ ही राज्य सरकार किस नीति के तहत पारदर्शी और प्रभावी तरीके से प्री-मेच्योर रिलीज का लाभ दे रही है. साल में तीन बार पहली अप्रैल, पहली अगस्त और पहली दिसंबर को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण इस पर सालाना बैठक करेगा. ये चौमासा बैठक इन मामलों पर निगरानी के लिए होगी.
'अदालत के फैसलों का सही से होना चाहिए पालन'
यह बैठक राज्य के गृह विभाग के प्रभारी के साथ कारावास महानिदेशक के साथ की जाएगी. उस बैठक में यह देखा जाएगा कि अदालत के आदेश का सही से पालन किया जा रहा है या नहीं. राज्य सरकार पूरी तरह से कानूनी नियमों के तहत प्री-मेच्योर रिलीज पर अदालत के निर्देशों के तहत काम करेगी. इसके साथ ही सरकार प्री-मेच्योर रिलीज पर अंतिम फैसला लेगी.
सभी दोषियों के प्री-मेच्योर रिलीज के मामलों का निपटारा तीन महीने में किया जाएगा.
अदालत ने इन राज्यों से मांगा जवाब
इसके लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा. ताकि सूचना आसानी से मिल सके कि कौन से दोषी कैदी प्री-मेच्योर रिलीज के योग्य हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सजा अवधि पूरी होने से पहले दोषी ठहराए गए कैदियों की रिहाई के मामले में बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
किन कैदियों को समय से पहले छोड़ा जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से पूछा है कि इस बाबत उन्होंने क्या कदम उठाए हैं? कोर्ट ने पूछा है कि राज्य सरकारें किस नीति के तहत प्री-मेच्योर रिलीज करते हैं और किस तरह से प्रक्रिया निभायी जाती है? सुनवाई के दौरान यूपी के AAG ने कोर्ट को बताया कि पुरानी पॉलिसी के अनुसार 2,228 कैदियों ने कैद के 14 साल पूरे कर लिए हैं, ऐसे कैदियों को समय से पहले छोड़ा जा सकता है.
16 साल जेल में बिताना जरूरी
बता दें कि जेल के DG सबसे उच्च अधिकारी होते हैं. मामला सरकार के पास जाता है फिर राज्यपाल के पास और फिर आदेश आता है. नई पॉलिसी के तहत 16 साल कैद में बिताना जरूरी है. नई पॉलिसी 2018 में आने वाली तारीख या उसके बाद जिनको दोषी करार दिया है उनपर लागू होती है. यूपी DG जेल ने सुप्रीम कोर्ट को हलफनामा दाखिल कर बताया कि 1,16,000 कैदी जेल में हैं, जिनमें से 88 हजार के खिलाफ अभी मुकदमा चल रहा है. 26,734 में 16,262 आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, जिनमे से 2,228 कैदी 14 साल की जेल की सजा काट चुके हैं. बीते 5 साल में 37 हजार कैदियों को समय से पहले रिहा किया गया है.