
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि वह राज्य में सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति के हुए नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजे गए नोटिस पर कार्रवाई न करे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य कानून और नए नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है. मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की बेंच ने कहा कि पहले की नोटिस के अनुसार कार्रवाई न करें. सभी कार्रवाई नए नियमों के अनुसार की जानी चाहिए.
उत्तर प्रदेश की ओर से पेश वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने कहा कि राज्य सुनवाई की आखिरी तारीख से आगे बढ़ा है और ट्रिब्यूनल का गठन किया है और सभी आवश्यक नियम बनाए हैं.
कोर्ट ने प्रसाद को एक जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए कहा जिसमें नियमों और अधिकरणों का विवरण दिया गया हो और मामले को दो सप्ताह के बाद आगे की सुनवाई के लिए बढ़ा दिया है.
परेशान करने के लिए नोटिस
सुप्रीम कोर्ट में पिछले साल जनवरी में परवेज आरिफ टीटू नाम के याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि यूपी में अल्पसंख्यकों को परेशान करने के मकसद से नुकसान की भरपाई के नोटिस भेजे जा रहे हैं.
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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू किए जाने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में भी सीएए के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे. विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी थी. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आगजनी भी की थी. आगजनी में सरकारी और गैर सरकारी संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचा था. अनुमान के मुताबिक सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुई आगजनी में करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था.
योगी सरकार ने इसे लेकर सख्त रुख अपनाया था. इस मामले में पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था. राजधानी लखनऊ में हिंसा और आगजनी के मामले में आरोपियों के पोस्टर भी चौराहों पर लगवाए गए थे. इसे लेकर भी काफी हंगामा मचा था.