
लक्षद्वीप से दोबारा अयोग्य ठहराए गए एनसीपी सांसद मोहम्मद फैजल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए फैजल को सदस्यता बरकरार रखते हुए उनकी दोष सिद्धि पर मुहर लगाने वाले केरल हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है.
फैजल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर लक्षद्वीप शासन से जवाब मांगा है. अयोग्य करार दिए गए लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल ने केरल हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
लक्षद्वीप से एनसीपी के सांसद और हत्या का प्रयास कांड में दोषी मोहम्मद फैजल ने भी रिकॉर्ड बनाया है. एक साल में दो बार सांसद पद से अयोग्य होने का. जिस केरल हाईकोर्ट ने पहले फैजल को सजा निरस्त की थी इस बार उसने ऐसा करने से इंकार कर दिया.
बस लोकसभा सचिवालय ने भी तीन अक्टूबर को हाई कोर्ट से जारी हुए हुक्म के आधार पर फैजल को फिर लोकसभा सदस्य के अयोग्य ठहराए जाने का परवाना पकड़ा दिया.
अब लोकसभा सचिवालय के मुताबिक फैजल की अयोग्यता उनको सजा सुनाए जाने के समय 11 जनवरी 2023 से ही प्रभावी हो गई है. पहली बार फैजल इस फैसले के दो दिन बाद ही 13 जनवरी को उनकी अयोग्यता का पत्र जारी कर दिया गया था.
निर्वाचन आयोग ने 19 जनवरी को लक्षद्वीप में उपचुनाव का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया था. इसी बीच केरल हाईकोर्ट ने 25 जनवरी को उनकी सजा पर रोक लगा दी थी. इसके फौरन बाद राकांपा यानी एनसीपी नेता मोहम्मद फैजल की लोकसभा सदस्यता बहाल करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.
वकील अशोक पांडे ने यह याचिका दायर कर कहा कि क्या एक अभियुक्त की दोषसिद्धि पर अदालत द्वारा लगाई गई रोक के आधार पर लोकसभा सदस्य की अयोग्यता को रद्द कर उसे फिर बहाल किया जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने 29 मार्च को राकांपा नेता और लक्ष्यद्वीप सांसद मोहम्मद फैजल की सदस्यता बहाल करने की लोकसभा सचिवालय की अधिसूचना के मद्देनजर संसद सदस्य के तौर पर उनकी अयोग्यता के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा कर दिया था.
29 मार्च को लोकसभा सचिवालय द्वारा अधिसूचना को रद्द करने की मांग करते हुए अपनी याचिका में कहा कि यदि एक बार संसद या राज्य विधानमंडल के सदस्य ने संविधान के आर्टिकल 102 और 191 के तहत अपना पद खो दिया है तो ऐसे में अदालत द्वारा उसे जब तक आरोपों से बरी नहीं किया जाता तब तक उस व्यक्ति को अयोग्य ही घोषित किया जाएगा.
याचिका में उन्होंने कहा कि कृपया इस मुद्दे का फैसला करें कि क्या किसी अभियुक्त की दोषसिद्धि को अपील की अदालत द्वारा रोका जा सकता है?
अगर हां तो क्या दोषसिद्धि पर रोक के आधार पर ऐसा व्यक्ति जिसे अयोग्यता का सामना करना पड़ा है, संसद के सदस्य के रूप में दोबारा योग्य हो जाएगा?
फैजल ने अपनी लोकसभा सदस्यता तब खो दी थी जब उन्हें एक आपराधिक मामले में आईपीसी की धारा 307 के तहत दोषी ठहराया गया था. बाद में उन्हें इस मामले में दस साल की सजा सुनाई गई थी. उन्होंने कहा कि इस याचिका को दायर करने की आवश्यकता तब पैदा हुई जब लोकसभा अध्यक्ष ने केरल के हाई कोर्ट के एक आदेश के आधार पर सजा के आदेश पर रोक लगाते हुए मोहम्मद फैजल की संसद सदस्यता को बहाल कर दिया.
कावरत्ती की एक अदालत ने एनसीपी सांसद मोहम्मद फैजल को हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया था और उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी.
जनप्रतिनिधि कानून के तहत 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होने पर संसद सदस्य या विधानसभा सदस्य की सदस्यता रद्द हो जाती है.
ऐसे में कानून के तहत मोहम्मद फैजल की संसद सदस्यता रद्द हो गई. 11 जनवरी 2023 को अदालत ने मोहम्मद फैजल को हत्या का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई और 13 जनवरी को लोकसभा सचिवालय ने नोटिफिकेशन जारी कर उनके संसद सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया. वहीं स्थानीय अदालत के फैसले के खिलाफ मोहम्मद फैजल ने केरल हाईकोर्ट में अपील दायर की, जहां से 25 जनवरी को उनकी सजा पर स्टे लग गया. इसके बाद मोहम्मद फैजल ने लोकसभा सचिवालय से अपनी संसद सदस्यता बहाल करने की मांग की थी.