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'उमर खालिद का नाम साजिश से लेकर दिल्ली दंगों में शामिल', हाईकोर्ट ने फैसले में क्या-क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद की ओर से दायर जमानत याचिका खारिज कर दी है. दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर की बेंच ने मंगलवार को अपना फैसला सुना दिया. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद का नाम साजिश की शुरुआत से लेकर दंगों तक आया है.

उमर खालिद (फाइल फोटो) उमर खालिद (फाइल फोटो)
नलिनी शर्मा/संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 18 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 6:22 PM IST

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में कथित साजिश रचने और UAPA के तहत गिरफ्तार उमर खालिद की जमानत याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की. 

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर की बेंच ने फैसला सुनाया है. उमर खालिद ने निचली अदालत में जमानत अर्जी खारिज होने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अर्जी दाखिल की थी.

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हाईकोर्ट की 10 बड़ी बातें

1- हाईकोर्ट ने कहा कि दंगों की योजना बनाई गई थी. यह राजनीतिक संस्कृति या लोकतंत्र में विरोध नहीं था, बल्कि विनाशकारी और बेहद खतरनाक था. 

2- पहले से तय योजना के मुताबिक उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रहने वाले लोगों की आवश्यक सेवाओं को बाधित करने और असुविधा पैदा करने के लिए जानबूझकर सड़कों को अवरुद्ध किया गया था. जिससे दहशत और असुरक्षा की भावना पैदा हुई.

3- हाईकोर्ट ने कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस कर्मियों पर हमला किया गया. पुलिस का पीछा करना औऱ लोगों को दंगे में शामिल करना पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा है. यह प्रथम दृष्टया आतंकवादी कृत्य प्रतीत होता है.

4- समाज के एक वर्ग के मन में भय की भावना पैदा करते हुए परेशानी उत्पन्न करने के इरादे से ऐसा किया गया था. हाईकोर्ट ने कहा कि खालिद का नाम साजिश की शुरुआत से लेकर दंगों तक आया है.  

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5- साजिश को अंजाम देने में अलग-अलग आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं बताई गईं हैं. कई गवाहों ने अपीलकर्ता और अन्य आरोपियों की भूमिका, हिंसा, दंगों, वित्त और हथियारों के बारे में बताया है.

6- दंगे में इस्तेमाल किए गए हथियारों और हमले के तरीके और हिंसा से हुई मौतों से यह स्पष्ट होता है कि यह पूर्व नियोजित था.

7- साजिश की शुरुआत से लेकर दंगों के परिणाम तक अपीलकर्ता के नाम का बार-बार उल्लेख मिलता है.

8- बेशक अपीलकर्ता जेएनयू के मुस्लिम छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप का मेंबर था. लेकिन आरोपी ने अलग-अलग समय पर जंतर मंतर, जंगपुरा कार्यालय, शाहीन बाग, सीलमपुर, जाफराबाद और भारतीय सामाजिक संस्थान में कई बैठकों में भाग लिया. वह व्हाट्सएप पर डीपीएसजी (दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप) का सदस्य था.

9- कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता ने अपने अमरावती के भाषण में अमेरिका के राष्ट्रपति की भारत यात्रा का उल्लेख किया था. सीडीआर विश्लेषण से पता चलता है कि अपीलकर्ता और अन्य सह-आरोपियों के बीच दंगों के बाद एक के बाद एक कई कॉल किए गए थे. 

10- हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि इन दंगों की योजना दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 तक हुई बैठकों में बनाई गई थी. 

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