कोरोना वायरस का असर इंसान के फेफड़ों पर सबसे ज्यादा होता है. हालांकि इस गंभीर बीमारी से शरीर के कई अहम हिस्से भी अछूते नहीं हैं. एक्सपर्ट्स का दावा है कि कोरोना वायरस ना सिर्फ इंसान के फेफड़ों पर, बल्कि उसके दिमाग, किडनी और हृदय जैसे अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है.
संक्रमण मांसपेशियों को कमजोर कर सकता है, खून के थक्के धमनियों में प्रवाहित हो सकते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा के अध्ययन में 55 फीसद कोविड मरीजों के हृदय में गड़बडिां पाई हैं.
ऑक्सीजन की कम सप्लाइ, दिमाग के लिए खून के थक्के खतरनाक होते हैं. चीनी कोविड मरीजों पर जामा न्यूरोलॉजी के अध्ययन से जाहिर हुआ कि करीब 36.4 फीसद मरीजों के मस्तिष्क को क्षति पहुंची है.
फेफड़ों में संक्रमण से फाइब्रोसिस हो रहा. लांसेट ने 15 साल तक सार्स के असर का अध्ययन किया. इसमें जाहिर हुआ कि एक-तिहाई मरीजों के फेफड़ों की क्षमता कम हो गई
साइटोकाइन स्टॉर्म, सेप्टीसीमिया और कुछ दर्दनिवारक दवाइयां क्षति पहुंचा सकती हैं. इंटरनेशनल सोसाइटी ऑॅफ नेफ्रोलॉजी (आएसएन) की एक हालिया रिपोर्ट में पाया गया कि 25 से 50 फीसद कोविड मरीजों की किडनी खराब हो गई.
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थकान, अल्पकालिक भ्रम या स्मृतिलोप, अवसाद और शरीर में दर्द, कोविड के बाद रहने वाले सामान्य लक्षण हैं. जामा में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि पहली बार कोरोना वायरस के लक्षण मिलने के बाद औसत 60 दिनों बाद भी 87.4 फीसद मरीजों ने कम से कम एक लक्षण की शिकायत की.