कोरोना के लगातर बढ़ते मामले लोगों को डराने वाले हैं. जहां कोरोना की पहली लहर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक मानी जा रही ही थी, वहीं दूसरी लहर में युवा और बच्चे तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं. ये चिंता की बात इसलिए भी है क्योंकि बच्चों के लिए अभी कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं बन सकी है.
बच्चों में नया वेरिएंट फैलने का खतरा ज्यादा- कई शोध और स्टडीज के अनुसार कोरोना का नया वेरिएंट ज्यादा मजबूत और जानलेवा है. ये इम्यून सिस्टम और एंटीबॉडी को आसानी से प्रभावित कर सकता है.
कोरोना की पहली लहर का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों पर पड़ा था वहीं इस लहर के सबसे ज्यादा मामले स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में सामने आ रहे हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि ये वायरस इस बार किस तरह युवाओं और बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रहा है. कुछ महामारी वैज्ञानिकों का मानना है कि नया स्ट्रेन बच्चों के इम्यून सिस्टम को खराब कर सकता है जिसकी वजह से वो जल्दी बीमार पड़ सकते हैं.
नया वेरिएंट कितना खतरनाक है- कोविड के नए वेरिएंट को डबल म्यूटेंट वेरिएंट भी कहा जा रहा है जो हाल ही में भारत में पाया गया है. ये भी संभावना जताई जा रही है कि ब्रिटेन और ब्राजील के वेरिएंट ने ही अपना जेनेटिक रूप बदल लिया है जो एंट्री रिसेप्टर्स से जुड़ कर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा रहा है. इसकी वजह से लक्षण वाले संक्रमण बढ़ने की संभावना बढ़ गई है.
कोरोना के नए वेरिएंट से प्रभावित होने वाले बच्चों पर अभी ज्यादा स्टडी तो नहीं की गई है लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि नया वेरिएंट ज्यादा संक्रामक है और इसके लक्षण भी पहले से अधिक हो सकते हैं. ये जल्दी गंभीर हो सकता है जिसकी वजह से अस्पताल में भर्ती होने की भी स्थिति आ सकती है.
कोरोना के पहली लहर में माना जा रहा था कि बच्चे एसिम्टोमैटिक हो सकते हैं और उनसे घर के सदस्यों में कोरोना फैलने का खतरा हो सकता है. वहीं इस लहर में बड़ों से पहले बच्चों में ही लक्षण दिखाई दे सकते हैं और वो दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं.
बच्चों में कोरोना के लक्षण दिखने से डॉक्टर्स भी चिंतित हैं. ये लक्षण 2 से 16 तक के बच्चों में सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं. अस्पतालों में बच्चों की बढ़ती संख्या भी डॉक्टर्स के लिए परेशानी का सबब बन रही है.
जर्नल ऑफ ट्रॉपिकल पीडियाट्रिक्स पत्रिका के शोध के मुताबिक, हर 3 में से एक बच्चे को गंभीर कोरोना हो रहा है जिसकी वजह से उन्हें अस्पताल या आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है. हेल्थ एक्सपर्ट्स कोरोना की इस लहर को बहुत ही गंभीरता से लेने की सलाह दे रहे हैं.
क्या हैं कारण- बच्चों का अचानक बाहर ज्यादा निकलना, स्कूल-कॉलेज का खुल जाना, लोगों से मिलना, ग्रुप में खेलना, खराब हाईजीन और मास्क ना पहनने जैसे कुछ वजहों से ये नया वेरिएंट बच्चों को आसानी से अपने चपेट में ले रहा है.
क्या हैं लक्षण- बुखार, सिर दर्द, कफ और कोल्ड जैसे कोरोना के आम लक्षणों के अलावा स्किन रैशेज, कोविड टोज, लाल आंखें, शरीर और जोड़ों का दर्द, मिचली, पेट में ऐंठन, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संबंधी दिक्कतें, फटे होंठ, थकान और सुस्ती जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज ना करें. छोटे बच्चों और नवजात में स्किन के रंग का बदलना, बहुत ज्यादा बुखार, भूख ना लगना, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द, होठों- त्वचा में सूजन और मुंह में छाले जैसे लक्षण हो सकते हैं.