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Worlds AIDS Day : एक नहीं एचआईवी और एड्स की बीमारी

एड्स और एचआईवी को लेकर दुनिया में बहुत सी भ्रांतियां हैं. उनमें से एक यह है कि एड्स और एचआईवी एक ही बीमारी है. जबकि ऐसा नहीं है. ये दोनों अलग-अलग बीमारियां हैं. आइये इनके बारे में जानते हैं.

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मेधा चावला
  • नई दिल्ली,
  • 01 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST

यौन से संबंधि‍त बीमारियों में एचआईवी को सबसे खतरनाक माना जाता है. संभवत: ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसे पूरी तरह ठीक करने की दवा अब तक विकसित नहीं की जा सकी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑगेनाइजेशन की हालिया रिपोर्ट की मानें तो दुनिया भर में होने वाली मौतों की सबसे बड़ी वजहों में एचआईवी संक्रमण प्रमुख है.

लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एचआईवी और एड्स में अंतर है. एचआईवी पॉजीटिव होने का मतलब ये नहीं कि उस व्यक्ति को एड्स हो गया है. इसलिए इसके बारे में सही जानकारी बेहद जरूरी है.

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एड्स से अलग है एचआईवी
दरअसल, HIV (Human Immunodefeciency Virus) का संक्रमण हमारी प्रतिराधक क्षमता को कमजोर बना देता है. इम्यून सिस्टम के एक बार कमजोर होते ही, दूसरी संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. क्योंकि शरीर में संक्रमण रोकने की ताकत खो जाती है. जबकि इससे इतर एड्स HIV का अगला चरण माना जाता है. आप इसे इस तरह समझ सकते हैं कि जिस तरह एक महीने तक रहने वाली बलगम वाली खांसी, टीवी का रूप ले लेती है. जाहिर तौर पर हम खांसी और टीबी को एक तरह नहीं देख सकते हैं.

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कैसे होता है HIV
  • एचआईवी संक्रमित व्‍यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध
  • संक्रमित रक्‍त चढ़ाने से
  • सं‍क्रमित सुई के इस्‍तेमाल से
  • गर्भवती महिला से उसके होने वाले शिशु को यह संक्रमण हो सकता है
  • बच्चे को यह संक्रमण स्‍तनपान के जरिये भी हो सकता है

कितने लोग हैं इसके शिकार
WHO की हालिया रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में फिलहाल 35.3 मिलियन यानी करीब साढ़े तीन करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित हैं. इनमें से करीब-करीब 21 लाख लोगों की उम्र 10 से 19 साल के बीच है।

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बच्चों में संक्रमण
सही समय पर जांच व इलाज करवा लिया जाए, तो संक्रमित गर्भवती मां से होने वाले बच्‍चे को इस रोग से बचाया जा सकता है। एक आंकड़े के अनुसार साल 2012 में एचआईवी से संक्रमित 62 फीसदी गर्भवती महिलाओं के बच्चों को इसी तरह संक्रमण से बचाया गया था.

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टीबी का खतरा
चुकी एचआईवी संक्रमण होने पर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, इसलिए टीबी का खतरा काफी बढ़ जाता है। साल 2012 में एचआईवी संक्रमित करीब तीन लाख 32 हजार रोगियों की मौत टीबी से हुई।

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इससे बचने के उपाय

  • यौन संचारित रोगों की नियमित जांच करवाते रहें
  • सुरक्षि‍त यौन संबंध बनाएं
  • इस्‍तेमाल की गई सीरिंजों का दोबारा इस्तेमाल न करें
  • खून चढ़ाने से पहले उसकी शुद्धता की पुष्टि जरूर कर लें

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