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Heart Attack: मुंह के अंदर दिख रहा ये लक्षण हार्ट अटैक का वॉर्निंग साइन, ना करें इग्नोर

कार्डियोवस्क्यूलर डिसीज की तरफ इशारा करने वाले कुछ संकेतों पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता है. एक स्टडी के मुताबिक, मुंह के अंदर नजर आने वाले कुछ लक्षणों के से हार्ट अटैक का वॉर्निंग साइन होते हैं.

मुंह के अंदर दिखने वाला ये लक्षण हार्ट अटैक का संकेत (Photo: Getty Images) मुंह के अंदर दिखने वाला ये लक्षण हार्ट अटैक का संकेत (Photo: Getty Images)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 10:11 AM IST
  • हार्ट अटैक के लिए सिर्फ हाई बीपी, हाई कॉलेस्ट्रोल नहीं जिम्मेदार
  • दिल की बीमारियों की ओर इशारा करने वाले कुछ कुछ लक्षणों पर दें ध्यान

हार्ट अटैक के लिए हाई ब्लड प्रेशर, हाई कॉलेस्ट्रोल, जेनेटिक डिसॉर्डर या बढ़ती उम्र जैसे कारण जिम्मेदार होते हैं. लेकिन कार्डियोवस्क्यूलर डिसीज की तरफ इशारा करने वाले कुछ संकेतों पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता है. एक स्टडी के मुताबिक, मुंह के अंदर नजर आने वाले कुछ लक्षण भी हार्ट अटैक का वॉर्निंग साइन हो सकते हैं.

फोरसिथ इंस्टिट्यूट और हारवर्ड यूनिवरिस्टी के वैज्ञानिकों द्वारा कंडक्ट जर्नल ऑफ पीरियोडोंटल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीरियडोंटाइटिस से जूझ रहे लोगों में दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम ज्यादा होता है. डॉक्टर्स ने मसूड़ों की सूजन और आर्टरियल इनफ्लेमेशन (धमनियों में सूजन) के बीच एक मजबूत कनेक्शन पाया है, जो कि हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल से जुड़ी दूसरी बीमारियों का कारण हो सकता है.

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इस स्टडी की शुरुआत में 304 वॉलंटियर्स की धमनियों और मसूड़ों का टोमोग्राफी स्कैन किया गया. चार साल बाद फिर से इन लोगों की स्कैनिंग की गई जिसमें 13 लोगों में दिल से संबंधित बीमारियों का जोखिम ज्यादा देखा गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि पीरियोडोंटल इन्फ्लेमेशन से ग्रसित लोगों में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा ज्यादा हो सकता है.

मुंह के लक्षणों को ना करें इग्नोर
शोधकर्ताओं के मतुाबिक, यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि पीरियोडोंटल डिसीज से पहले जिन लोगों को हड्डियों से जुड़ी समस्याएं हो रही थीं, उनमें हार्ट डिसीज का खतरा नहीं था. जिन लोगों के मसूड़ों में सूजन देखी गई, केवल उन्हीं में ऐसी दिक्कत पाई गई. शोधकर्ता मानते हैं कि पीरियोडोंटल इन्फ्लेमेशन हड्डियों के माध्यम से संकेत देने वाली कोशिकाओं को एक्टिवेट करती है जिससे धमनियों में इन्फ्लेममेश की समस्या बढ़ जाती है.

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शोधकर्ता चेतावनी देते हुए कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति दिल से जुड़ी बीमारियों के प्रति संवेदनशील है तो ऐसे लोगों को पीरियोडोंटल डिसीज को इग्नोर नहीं करना चाहिए. आप चाहें तो इसके लिए डेंटिस्ट की मदद भी ले सकते हैं. डेंटिस्ट आपके मसूड़ों की जांच करने के बाद संभावित खतरों के बारे में बता सकता है और वक्त रहते उसका इलाज करा सकते हैं.

 

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