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जीन्स में बदलाव कर रहा है कोरोना ताकि शरीर में बना सके परमानेंट घर

अमेरिका में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना वायरस इंसानी शरीर के जीन्स में बदलाव कर सकता है ताकि वो दोबारा कोशिकाओं में पैदा हो सके. इस रिसर्च में वैज्ञानिकों की टीम को SARS-CoV-2 के अनूठे मैकेनिज्म की जानकारी मिली है जिसका असर इंसान के स्वास्थ्य पर पड़ता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: Getty) प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: Getty)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 28 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 7:39 PM IST

अमेरिका में हुई एक स्टडी में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस संक्रमित हो चुके लोगों की जीनोम संरचना में बदलाव कर सकता है. वैज्ञानिकों ने बताया कि ये बदलाव लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षणों से जुड़े हो सकते हैं.

अमेरिका के ह्यूस्टन में मैकगर्वन मेडिकल स्कूल के डिपार्टमेंट ऑफ बायोकेमिस्ट्री एंड मॉलिकुलर बायोलॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर और इस अध्ययन के मुख्य लेखक वेनबो ली ने कहा, ''यह खास रिसर्च काफी अनूठी है और कोरोना पर इससे पहले हुई बाकी रिसर्च में हमें ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला है. हमें रिसर्च में SARS-CoV-2 के अनूठे मैकेनिज्म की जानकारी मिली है जो स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों से जुड़ा है.''

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वैज्ञानिकों के अनुसार, ये रिसर्च उन्हें यह समझने में मदद करेगी कि कोरोना वायरस के खिलाफ इम्युनिटी कैसे काम करती है और कोरोना क्या-क्या चुनौतियां पैदा करता है.

क्या कहती है रिसर्च

स्टडी में बताया गया है कि हमारा जेनेटिक मटीरियल कोशिकाओं के केंद्रक (cell nucleus) में पाई जाने वाली क्रोमैटिन नामक संरचना में जमा होता है. स्टडी के दौरान पता चला है कि कुछ वायरस हमारे क्रोमैटिन को हाइजैक यानी एक तरह से उनमें बदलाव कर देते हैं ताकि वो उन कोशिकाओं में सफलतापूर्वक फिर से पैदा हो सकें.

वैज्ञानिकों ने बताया कि वो फिलहाल यह नहीं बता सकते हैं कि SARS-CoV-2 हमारे क्रोमैटिन को किस तरह से प्रभावित करता है.

'नेचर माइक्रोबायोलॉजी' नामक पत्रिका में प्रकाशित इस स्टडी में कोविड-19 संक्रमण के बाद मानव कोशिकाओं में क्रोमैटिक संरचना में बदलाव की जानकारी दी गई है.

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इंसानों के जीन्स को बदल रहा कोरोना

इस रिसर्च के मुख्य लेखक और अमेरिका के ह्यूस्टन में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस हेल्थ साइंस सेंटर में सहायक प्रोफेसर वेनबो ली ने बताया, ''शोध के दौरान हमने देखा कि किसी सामान्य कोशिका में अच्छी तरह से बनी हुई क्रोमैटिन संरचना भी कोरोना संक्रमण के बाद अव्यवस्थित हो रही है.'' 

भयानक बीमारी होने का खतरा 
यह मिश्रण इंफ्लेमेशन (सूजन) से जुड़े अहम जीन इंटरल्यूकिन-6 समेत कुछ और जीन्स में बदलाव की वजह बन सकता है जिससे कोरोना से पीड़ित मरीजों को साइटोकिन की बीमारी हो सकती है. 

साइटोकिन्स छोटे प्रोटीन होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं और रक्त कोशिकाओं के विकास और गतिविधि को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

साइटोकिन की कंडीशन में खून में तेजी से अनगिनत साइटोकिन्स आ जाते हैं जो एक गंभीर स्थिति है. साइटोकिन्स सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं (इम्युनिटी से जुड़े काम) में अहम किरदार अदा करते हैं लेकिन शरीर में एक साथ बड़ी मात्रा में इनका रिलीज होना हानिकारक हो सकता है. कुछ मामलों में इस कंडीशन में शरीर के दूसरे हिस्सों को नुकसान पहुंचने लगता है.

इस स्टडी में यह भी पाया कि SARS-CoV-2 क्रोमैटिन में होने वाले सामान्य रासायनिक बदलावों को भी प्रभावित कर सकता है.

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इस स्टडी के एक और रिसर्चर शियाओइ युआन ने कहा, ''हमारी खोज क्रोमैटिन पर वायरस के प्रभावों को समझने के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान कर सकती है. शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि ये निष्कर्ष वायरस के दीर्घकालिक प्रभावों को समझने और रिसर्च के नए-नए रास्ते खोलेंगे.''

 

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