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PM Modi Performed Yoga: पीएम मोदी ने श्रीनगर में किए ये योगासन, जानें क्या हैं उनके फायदे

International Day of Yoga 2024: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2024 के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीनगर में लोगों के साथ योग किया. उन्होंने कौन-कौन से योग किए और उन योगासनों के क्या फायदे हैं, इस बारे में जानेंगे.

पीएम मोदी ने श्रीनगर में किया योग. पीएम मोदी ने श्रीनगर में किया योग.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 जून 2024,
  • अपडेटेड 10:37 AM IST

International Yoga Day 2024: आज पूरी दुनिया 21 जून यानी इंटरनेशनल योग दिवस के रूप में मना रही है. पीएम मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया था. आज जहां योग दिवस के मौके पर केंद्रीय मंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों में योग कर रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी श्रीनगर में हैं और उन्होंने भी वहां सामूहिक योग किया. पीएम मोदी ने अलग-अलग तरह के योगासन किए. तो आइए जानते हैं पीएम मोदी ने जो योगासन किए, उन्हें करने के क्या फायदे होते हैं.

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वज्रासन (Vajrasana) 

पीएम मोदी काफी देर वज्रासन स्थिति में बैठे रहे. वज्र का अर्थ होता है कठोर यानी कि इस योगासन को करने से शरीर मजबूत बनता है. वज्रासन करने से वेरिकोज वेन्स, ज्वाइंट पेन और गठिया जैसे रोगों से दूर रखने में मदद मिलती है. इसे करने से पाचन शक्ति बढ़ती है और पेट से संबंधित रोग भी दूर होने लगते हैं.

तितली आसन (Titli asana)

तितली आसन करते समय आपकी मुद्रा ऐसी हो जाती है जैसी तितली की पंख हिलाते समय होती है. इस योग को बैठकर किया जाता है और इसमें पीठ को बिल्कुल सीधी रखनी होती है. इससे पैरों को मजबूती मिलती है. अंदर की जांघों में ताकत आती है, मसल्स में खिंचाव आता है, आंतों को फायदा पहुंचाता है और ब्लैडर के लिए अच्छा होता है.

सेतुबंधासन (SetuBandhasana)

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सेतुबंधासन दो शब्दों से मिलकर बना है, सेतु का मतलब ब्रिज और बंध का मतलब बांधना. यानी कि इस योगासन में आपकी मुद्रा एक सेतु की तरह हो जाती है. सेतुबंधासन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आता है, दिमाग को शांत करता है, डाइजेशन सही रखता है, फेफड़ों को मजबूत बनाता है, अस्थमा, हाई बीपी, ऑस्टियोपोरोसिस में भी फायदेमंद है. 

उत्तानपादासन (Uttanpadasana)

उत्तानपादासन नाम दो शब्दों से मिलकर बना है उत्तान और पद. उत्तान का मतलब होता है खिंचा हुआ और पद का मतलब होता है पैर. यानी कि उत्तानपादासन में आपको अपने पैरों को खींचकर ऊपर 90 डिग्री पर स्थिर रखना होता है. अगर किसी को इसे करने में परेशानी होती है तो वह दीवार का सहारा भी ले सकता है. उत्तानपादासन करने से गर्दन और छाती के मसल्स पर खिंचाव आता है, कंधे के मसल्स लूज होते हैं, थायरॉइड, कब्ज, शुगर, एंग्जाइटी में इसे फायदेमंद बताया जाता है.

भुजंगासन (Bhujangasana)

भुजंगासन में उल्टा लेटकर अपर बॉडी को हाथों की मदद से ऊपर उठाना होती है. ऐसे में आपके शरीर की स्थिति फन उठाए हुए सर्प जैसी होती है. यह सूर्यनमस्कार के 12 आसनों में 7वीं स्थिति होती है. इसे करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, पीठ दर्द कम होता है, डाइजेशन सही रहता है और कंधों का दर्द भी कम होता है.

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बलासन (Balasana)

बलासन से कूल्हों, जांघों, और टखनों में खिंचाव आता है. इसमें आपकी स्थिति बच्चे की तरह होती है. यह शरीर को आरामदायक स्थिति में ले जाने वाला योगसन है जिसे कभी भी किया जा सकता है. इससे दिमाग शांत रहता है, डिप्रेशन कम होता है, सिर और धड़ में बैलेंस बनाता है, कमर दर्द को ठीक करता है, ऊपरी शरीर में खिंचाव पैदा होता है.

शलभासन (Salabhasana)

शलभासन कमर और पीठ को मजबूत करता है और डाइजेशन में मदद करता है. कंधों को मजबूती देता है और नसों को आराम देता है. इससे पेट के मसल्स भी मजबूत होते हैं.

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