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दोस्त अमीर हों तो बड़े होकर खुद भी रईस बनते हैं बच्चे, जानिए क्या कहता है हार्वर्ड का शोध

बचपन में अमीर दोस्तों के साथ रहने पर बहुत मुमकिन है कि कमजोर इकनॉमिक कंडीशन वाले बच्चे भी आगे चलकर अमीर बनें. हार्वर्ड और स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ये रिसर्च एक बहुत लंबे-चौड़े ग्रुप पर हुई, जिसमें पाया गया कि अमीर दोस्तों का साथ जीवन पर पॉजिटिव असर डालता है, और ऐसे ग्रुप में रहने वाले गरीब परिवार के बच्चे भी भविष्य में अच्छी कमाई करते हैं.

अमीर लोगों की कॉलोनी में रहना और उनसे दोस्ती आर्थिक दूरी पाट सकती है. सांकेतिक फोटो (Pixabay) अमीर लोगों की कॉलोनी में रहना और उनसे दोस्ती आर्थिक दूरी पाट सकती है. सांकेतिक फोटो (Pixabay)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 17 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST

बीते साल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की टीम ने ये जानने की कोशिश की कि गरीबी से निकलने में कौन सी चीज ज्यादा मदद करती है. इसके लिए लगभग 72 मिलियन फेसबुक यूजर्स का डेटा लिया गया. 25 से 44 साल के इन लोगों पर स्टडी में दिखा कि पढ़ाई और सपनों जितना ही बड़ा रोल दोस्तों का साथ भी निभाता है. दोस्त, वो भी रईस. 

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कमजोर आर्थिक स्थिति वाले बच्चे या किशोर अगर ऐसी कॉलोनी या सर्कल में रहें, जहां 70 प्रतिशत लोग मजबूत घरों से हैं, तो एडल्ट होने पर उनकी कमाई औसतन 20 प्रतिशत बढ़ जाती है. ये बहुत बड़ी बात है. रिसर्च में ये भी निकला कि पढ़ाई या काम भी इसकी गारंटी नहीं देते कि आगे चलकर इनकम में इतने या उतने प्रतिशत का इजाफा हो सकेगा, लेकिन अमीर दोस्तों के बीच रहना देता है. रिसर्चरों ने इसे इकनॉमिक कनेक्टेडनेस कहा. 

अमेरिका में हुई इस रिसर्च में कई इलाकों को लिया गया, जहां अमीर-गरीब दोनों तबका रहता हो, लेकिन संख्या अलग-अलग हो. हम यहां दो ऐसे इलाकों का उदाहरण लेते हैं. मिनियापोलिस में ज्यादातर आबादी अच्छे पैसे कमाती थी, जबकि कुछ प्रतिशत लोग गरीब परिवारों से थे. दोनों तबकों के बीच मेलजोल था. वहीं इंडियानापोलिस में अमीर-गरीब के बीच दूरी थी और वहां कमजोर इकनॉमिक हालातों वाले लोग ज्यादा थे. लंबी चली इस रिसर्च में पाया गया कि मिनियापोलिस के बच्चे जब युवा हुए तो उनकी कमाई रईसों के लगभग बराबर आ गई. वहीं इंडियानापोलिस के बच्चे वयस्क होने पर भी कमजोर आर्थिक हालातों में जीते दिखे. दोनों जगहों के एक समय पर गरीब परिवारों की कमाई में कुछ सालों के भीतर बड़ा फर्क आ गया. 

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आर्थिक दूरी कम करने पर हुई स्टडी के पॉजिटिव नतीजों को इकनॉमिक कनेक्टेडनेस कहा गया. सांकेतिक फोटो (Pixabay)

शोध में ये भी दिखा कि अलग-अलग आर्थिक तबके से आने वाले बच्चे एक खास उम्र तक ही एक-दूसरे से दोस्ती कर पाते हैं. 15 साल की उम्र के बाद उनका आपस में मिल पाना मुश्किल होता जाता है. इसे फ्रेंडिंग बायस कहा गया. शोधकर्ताओं ने ये रिसर्च इस मकसद को ध्यान में रखते हुए की कि समाज में आर्थिक गैप कम किया जा सके. 

वैसे यहां ये जानना दिलचस्प होगा कि अमीर दोस्तों के साथ उठने-बैठने पर अमीरी कैसे आती है. इसके लिए वर्चुअल डेटा से अलग शोधकर्ताओं ने ऐसे वयस्कों को लिया, जो अलग इकनॉमिक हालातों के बाद भी दोस्त थे. अलग-अलग गतिविधियों के लिए उनके मस्तिष्क का रिस्पॉन्स देखा गया.

फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग तकनीक के जरिए ब्रेन स्टडी में दिखा कि दोस्त बहुत जल्दी एक-दूसरे की पसंद से जुड़ने लगते हैं. यानी अगर अमीर बच्चे को हेल्दी खाने या सफाई से रहने की आदत है तो उसके साथ रहता दूसरा बच्चा भी वही पसंद करने लगेगा और कोशिश करेगा कि वैसा ही जीवन रख सके. यही वजह है कि ऐसे बच्चे ज्यादा मेहनत करते और एडल्टहुड में वो सारी चीजें पाने की कोशिश करते हैं, जो वे देखते आए.

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