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ऐसे स्वभाव वाले लोगों को ज्यादा आता है हार्ट अटैक! आप ये 3 गलतियां बिल्कुल ना करें

आजकल बेहद कम उम्र में ही लोगों को हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट की समस्या का सामना करना पड़ता है. इसके पीछे कई कारण होते हैं जिसमें ये एक कारण है आपकी पर्सनैलिटी. आइए जानते हैं कैसे पर्सनैलिटी के कारण हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है.

ऐसे स्वभाव के लोगों को ज्यादा आता है हार्ट अटैक! (Photo Credit: Getty Images) ऐसे स्वभाव के लोगों को ज्यादा आता है हार्ट अटैक! (Photo Credit: Getty Images)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2022,
  • अपडेटेड 7:59 PM IST
  • पर्सनैलिटी से भी हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा
  • इन कारणों से बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा

आजकल के समय में हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट काफी आम हो चुका है. बूढ़ों के साथ ही नौजवान भी  हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट के शिकार हो रहे हैं. अधिकतर लोगों का यह मानना है कि हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापे और स्मोकिंग से हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा होता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ तरह की पर्सनैलिटी से भी हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा बढ़ता है. 

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पालो ऑल्टो मेडिकल फाउंडेशन में इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर रोनेश सिन्हा का कहना है कि जब कोई बेसब्र, आक्रामक और बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धी होता है तो उसे टाइप A पर्सनैलिटी कहा जाता है. इन्हें हार्ट अटैक का खतरा सबसे ज्यादा होता है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अगर आप टाइप A नहीं हैं तो आपको हार्ट अटैक नहीं आ सकता. कई बार आपके अलग बर्ताव के चलते भी हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा हो सकता है. तो आइए जानते हैं टाइप A ना होने के बाद भी किन कारणों से बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा.

टाइम प्रेशर- जब आपके ऊपर किसी काम को खत्म करने के लिए डेडलाइन सेट होती है या काम समय पर खत्म करने के लिए प्रेशर होता है तो इससे भी आपकी हार्ट हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है. डॉ. सिन्हा का कहना है कि भले ही आप इम्पेशंट, एग्रेसिव या बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धी ना हो लेकिन कई बार किसी की डिमांड को पूरा करने के लिए आपके ऊपर काफी ज्यादा दबाव बढ़ जाता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ता है. तो अगर आप स्ट्रेस को कम करना चाहते हैं तो काम को प्राथमिकता के आधार पर करें. जो काम ज्यादा जरूरी ना हो उसे आराम से करें. 

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मल्टीटास्किंग- बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो एक ही समय में कई कामों को एक साथ कर लेते हैं. आपने बहुत से लोगों को ड्राइव करने के साथ मैसेज करते हुए या खाना खाते समय फोन पर बात करते हुए देखा होगा. हालांकि, मल्टीटास्किंग होने से हार्ट डिजीज का खतरा नहीं बढ़ता लेकिन डॉ. सिन्हा का कहना है कि इससे आपका स्ट्रेस लेवल बढ़ सकता है जिसका सीधा संबंध हार्ट डिजीज के खतरे से जुड़ा हुआ होता है. 

इमोश्नल कंट्रोल- बहुत से लोग खासतौर पर पुरुषों की आदत होती है कि वह अपने इमोशंस जैसे गुस्से और निराशा को किसी के सामने जाहिर नहीं करते. कई स्टडीज में यह बात सामने आई है कि ऐसे लोगों में क्रॉनिक हेल्थ कंडीशन जैसे हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा होता है. अगर आप अपने इमोशंस को अपने पार्टनर या फैमिली के साथ शेयर नहीं कर पा रहे हैं तो इसके लिए जरूरी है कि आप अपने दोस्तों, कोवर्कर्स या किसी थैरेपिस्ट के साथ अपनी बात को शेयर करें.

स्ट्रेस लेवल को कम करने में मदद करते हैं ये टिप्स

डॉ. सिन्हा ने कुछ ऐसे तरीके बताए हैं जिससे आपका स्ट्रेस कम हो सकता है और आपकी हार्ट हेल्थ पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ता. आइए जानते हैं उनके ये तरीके- 

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ना कहना सीखें- अगर आपको किसी चीज को लेकर काफी स्ट्रेस फील हो रहा है तो कोई भी काम जबरदस्ती करने से बचें, फिर चाहे वो ऑफिस का काम हो या कोई और. कुछ समय तक अपने आप को फ्री छोड़ दें. 

रिलैक्स रहें- जब भी आप किसी चीज की वजह से तनाव से जूझ रहे हों तो कोशिश करें कि धीरे-धीरे चलें, बात धीरे करें और सांस भी धीरे-धीरे लें.

योग या मेडिटेशन करें- अपने डेली रूटीन में मेडिटेशन और योग को शामिल करें. यह आपके दिमाग को शांत रहने में काफी मदद कर सकता है.

 

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