पूरी दुनिया अभी कोरोना वायरस से जूझ ही रही है, ऐसे में इस वायरस पर आ रही नई रिपोर्ट्स परेशान करने वाली है. रिपोर्ट्स की मानें तो मलेशिया में कोरोना वायरस का ऐसा स्ट्रेन मिला है जो 10 गुना ज्यादा खतरनाक है. कोरोना वायरस के म्यूटेशन की पहले भी कई खबरें आ चुकी हैं लेकिन कोरोना वायरस ने अब जो रूप बदला है, उसे सबसे ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है.
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इससे पहले अमेरिका के टॉप संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फाउची ने भी चेतावनी दी थी कि SARS-CoV-2 के स्वरूप में कुछ बदलाव देखे जा रहे हैं जिससे ये और तेजी से फैल सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मलेशिया में मिली कोरोना वायरस की नई किस्म 10 गुना ज्यादा संक्रामक है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, मलेशिया में कोरोना वायरस का जो म्यूटेशन हुआ है उसे D614G कहा जाता है.
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मलेशिया के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर नूर हिशम अब्दुल्लाह ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना वायरस का ये स्ट्रेन इतना खरतनाक है कि ये अब तक वैक्सीन पर की गई सभी स्टडी को बेकार कर सकता है. उन्होंने कहा, 'लोगों को सचेत रहने और ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि वायरस का बदला हुआ ये स्वरूप अब मलेशिया में पाया गया है.'
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डॉक्टर अब्दुल्लाह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'हमें लोगों के सहयोग की बहुत जरूरत है ताकि हम वायरस की श्रृंखला को तोड़कर म्यूटेशन से इंफेक्शन फैलने से रोक सकें.'
रिपोर्ट के अनुसार, 'ये म्यूटेशन अब तक 45 केस में तीन लोगों के समूह में मिला है. इसकी शुरूआत एक रेस्टोरेंट के मालिक से हुई थी. भारत से लौटे इस शख्स ने 14 दिनों के होम क्वारंटीन का उल्लंघन किया था. इसके आरोप में इसे पांच महीने की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी.
रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस का ये स्ट्रेन फिलीपींस से लौटे कुछ लोगों में भी पाया गया है. पिछले साल दिसंबर के महीने में पहली बार वुहान में इस वायरस की पहचान की गई थी. इसके बाद से वैज्ञानिकों ने इसके जेनेटिक मैटेरियल कई तरह के बदलाव देखे हैं. इस वायरस का सबसे ज्यादा म्यूटेशन यूरोप और अमेरिका में हुआ है.
हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वायरस के नए बदलाव से घबराने की जरूरत नहीं है. WHO का कहना है कि अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि वायरस का नया स्ट्रेन ज्यादा बीमार कर सकता है.
इस बीच, सेल प्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वायरस के स्वरूप में इस बदलाव का असर वर्तमान में पूरी दुनिया में बनाई जा रही वैक्सीन की क्षमता पर बहुत ज्यादा पड़ेगा जिसकी वजह से ये वैक्सीन बेअसर हो सकती हैं या फिर ये वायरस पर मामूली असर दिखाएंगीं.